राजधानी भोपाल के व्यस्त इलाके एमपीनगर में डीबी मॉल के सामने बिजली के खंभे से करंट लगने के कारण भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री एवं अधिवक्ता दिव्यऋषि तिवारी की दर्दनाक मौत के मामले में अब आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस घटना से दुखी स्वजनों और समर्थकों ने शनिवार को एमपीनगर में एक विरोध मशाल जुलूस निकाला और थाने का घेराव करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन थाना प्रभारी को सौंपा है। पुलिस द्वारा पहले अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद अब परिजनों ने जिम्मेदार अधिकारियों को भी इस मामले में नामजद करने की पुरजोर मांग उठाई है।
⚡ प्रशासनिक गाज: जांच रिपोर्ट के आधार पर सहायक यंत्री निलंबित, एक्सईएन पर कार्रवाई का प्रस्ताव
कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने दो अक्टूबर को बड़ी कार्रवाई करते हुए कार्यपालन यंत्री (EE) आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव ऊर्जा विभाग को भेजा है, जबकि सहायक यंत्री (AE) सुमित सिंह को घोर लापरवाही और उदासीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इसके बावजूद स्वजनों का कहना है कि जब इन दोनों अधिकारियों की स्पष्ट प्रशासनिक और पेशेवर जिम्मेदारी सामने आ चुकी है, तो पुलिस एफआईआर में इनके नाम क्यों नहीं जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने मामले में इनकी आपराधिक भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
🏥 नर्मदा ट्रामा सेंटर पर इलाज से इनकार का आरोप और स्वजनों की पांच प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान स्वजनों ने नर्मदा ट्रामा सेंटर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दुर्घटना के बाद अस्पताल ने घायल को भर्ती करने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें एम्स या हमीदिया अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया, यहाँ तक कि मांगने पर एंबुलेंस की मदद भी नहीं दी गई। इस दुखद घटना को लेकर परिजनों ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
- निलंबित अधिकारियों पर एफआईआर: आशीष श्रीवास्तव और सुमित सिंह की आपराधिक भूमिका की जांच कर उनके नाम एफआईआर में जोड़े जाएं।
- ट्रामा सेंटर की उच्चस्तरीय जांच: दिव्यऋषि को भर्ती करने से इनकार करने और एंबुलेंस न देने के आरोपों की पारदर्शी जांच हो।
- अस्पताल के खिलाफ एक्शन: लापरवाही साबित होने पर अस्पताल प्रबंधन का लाइसेंस रद्द कर सख्त कार्रवाई की जाए।
- अन्य दोषियों पर शिकंजा: विद्युत व्यवस्था में लापरवाही के लिए जिम्मेदार अन्य दोषी कर्मचारियों के नाम भी मुकदमे में शामिल हों।
- समयबद्ध जांच: पूरी जांच के लिए समय-सीमा तय हो और हर प्रगति की लिखित जानकारी स्वजनों को दी जाए।

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