September 16, 2026

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Barwani Anjad Rain Waterlogging: बड़वानी के अंजड़ में मूसलाधार बारिश का कहर, खेतों में भरा 2 फीट पानी; कपास की फसल पर संकट

बड़वानी। लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश ने जहां एक ओर क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर थोड़ी खुशी लाई थी, वहीं अंजड़ क्षेत्र के दर्जनों किसानों के लिए यही तेज बारिश अब भारी मुसीबत बन गई है।

रातभर हुई मूसलाधार बारिश के चलते क्षेत्र के खेतों में दो से ढाई फीट तक पानी भर गया है, जिससे कपास की लहलहाती फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। खेतों में पानी की उचित निकासी न होने के कारण सैकड़ों किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

⛰️ पहाड़ी क्षेत्र से आया पानी बना आफत: पर्याप्त निकासी न होने से खेतों में हुआ भारी जलभराव

स्थानीय किसानों का कहना है कि जब भी ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होती है, तो वहां से पानी बहकर नीचे अंजड़ क्षेत्र के खेतों में आ जाता है।

जल निकासी की कोई स्थायी शासकीय व्यवस्था न होने से सारा पानी खेतों में ही जमा होकर रह जाता है। कई स्थानों पर खेत और मुख्य रास्ते पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते खेतों से पानी बाहर निकालने का बंदोबस्त नहीं किया गया, तो पूरी फसल सड़ जाएगी।

☀️ ‘धूप खिली तो सड़ जाएगी पूरी फसल’: किसान कमल सिंह सोलंकी ने जताया नुकसान का अंदेशा

पीड़ित किसान कमल सिंह सोलंकी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया, “हमारी कपास की फसल पूरी तरह बनकर तैयार होने की स्थिति में आ चुकी थी। यदि खेतों में जमा यह पानी अगले दो से तीन दिनों तक बाहर नहीं निकलता और अचानक तेज धूप पड़ती है, तो पौधे गलकर खराब हो जाएंगे।”

उन्होंने बताया कि अंजड़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में करीब 100 एकड़ से भी अधिक कृषि भूमि में बोई गई कपास की फसल इस समय भारी जलभराव की चपेट में है।

🚜 4 महीने की मेहनत और लाखों की लागत पर फिरा पानी: किसान अंशुल पाटीदार का छलका दर्द

एक अन्य पीड़ित किसान अंशुल पाटीदार ने बताया कि मुख्य सड़क किनारे उनकी लगभग 40 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने कहा, “पिछले चार महीनों से दिन-रात मेहनत करने और लाखों रुपये खर्च करने के बाद कपास की फसल तैयार हुई थी। लेकिन पहाड़ी पानी की निकासी न होने से पूरे खेत तालाब बन गए हैं। अगर तुरंत पानी नहीं निकाला गया तो पूरी लागत डूब जाएगी।”

किसानों का कहना है कि यह हर साल की कहानी बन चुकी है, लेकिन प्रशासन द्वारा स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं कराई जा रही है।

📐 तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दे प्रशासन: परेशान किसानों ने की स्थायी जल निकासी की मांग

फसलें पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर पहुंचने से किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां खाद, बीज और कीटनाशकों के दाम बढ़ने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं प्राकृतिक आपदा और प्रशासनिक लापरवाही से हुए नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है।

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि अधिकारी तुरंत मौक-ए-वारदात पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लें, जलभराव वाले खेतों का तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का सही आकलन करें और पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिलाएं। इसके साथ ही भविष्य के लिए नाले/जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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