रतलाम में जनसुनवाई की व्यवस्था में किए गए बदलाव से आम जनता और आवेदकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि जिला मुख्यालय के अलावा बनाए गए अन्य सात केंद्रों पर जनसुनवाई के लिए आवेदन करने वालों की संख्या दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पा रही है। रतलाम नगर निगम, रतलाम ग्रामीण एसडीएम कार्यालय, जावरा एसडीएम कार्यालय और आलोट एसडीएम कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सन्नाटा पसरा रहा। इन सभी स्थानों पर फरियाद लेकर पहुंचने वाले आवेदकों की संख्या काफी कम दर्ज की गई।
🏢 7 अलग-अलग केंद्रों पर बांटी गई थी व्यवस्था; अधिकारियों की संख्या से कम दिखे लोग
कलेक्टर की नई पहल और स्थिति:
- विकेंद्रीकरण की योजना: करीब ढाई महीने पहले रतलाम पहुंचे कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिला मुख्यालय पर होने वाली जनसुनवाई की पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए जिले में 7 अलग-अलग जनसुनवाई केंद्र शुरू किए थे।
- अधिकारियों की तैनाती: इस व्यवस्था के तहत स्थानीय ब्लॉक के लोग अपने क्षेत्र के केंद्र पर पहुंचकर आवेदन दे सकते थे, जहां प्रत्येक मंगलवार को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक एसडीएम, तहसीलदार और नगरीय निकायों के कमिश्नर व सीएमओ को मौजूद रहना था। लेकिन इन केंद्रों पर आने वाले लोगों की संख्या वहां तैनात प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों से भी कम नजर आई।
🔍 ईटीवी भारत का रियलिटी चेक: खाली पड़े रहे रजिस्टर, अधिकारियों ने किया इंतजार
स्थानीय स्तर पर पड़ताल:
- नगर निगम सभा कक्ष: रतलाम शहर की जनसुनवाई नगर निगम के सभा कक्ष में आयोजित की जा रही है, जहां एसडीएम शहर तरुण जैन और कमिश्नर अनिल भाना समेत 20 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे, लेकिन दोपहर 12 बजे तक एंट्री रजिस्टर में एक भी आवेदन दर्ज नहीं हुआ था। कुल मिलाकर बमुश्किल 10 से 15 आवेदक ही वहां पहुंचे।
- ग्रामीण और अन्य केंद्र: रतलाम ग्रामीण एसडीएम कार्यालय में दोपहर 12:30 बजे तक केवल 5 आवेदन दर्ज हुए, जबकि जावरा एसडीएम कार्यालय में दोपहर 1 बजे तक सिर्फ 9 आवेदन ही मिले। आलोट और अन्य जगहों पर भी यही निराशाजनक नजारा देखने को मिला।
🚶♂️ दर-दर भटकने को मजबूर शिकायतकर्ता; कलेक्टर से मिलने की लगा रहे गुहार
आवेदकों की पीड़ा और समस्याएं:
- प्लाट पर कब्जे की शिकायत: जनसुनवाई में पहुंचे आवेदक खेमराज ने बताया कि उनके प्लाट पर किसी अन्य व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है, जिसकी शिकायत लेकर वे पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
- फर्जी नामांतरण का मामला: एक अन्य आवेदक युसूफ खान ने बताया कि उनकी पत्नी के नाम के प्लाट का फर्जी नामांतरण हो गया है, जिसके लिए उन्हें कभी नगर निगम तो कभी पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, और दोनों जगहों पर उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
- मिड डे मील संचालकों की समस्या: मिड डे मील का खाना बनाने वाले स्वयं सहायता समूह के संचालक पिछले 4 महीने से भुगतान न मिलने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन तीन बार चक्कर काटने के बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
⚖️ प्रशासन की सफाई और जनता का असंतोष
अधिकारियों का पक्ष:
- एडीएम का बयान: एडीएम बृजेंद्र रावत ने स्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि जिले में अलग-अलग स्थानों पर जनसुनवाई सुचारू रूप से चल रही है, और जो लोग वहां से असंतुष्ट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं, उनके आवेदन भी जिला स्तर पर स्वीकार किए जा रहे हैं।
- बढ़ता रोष: हालांकि, जमीनी सच्चाई यह है कि जिला मुख्यालय पर कलेक्टर से मिलने की आस में कलेक्ट्रेट के बाहर बड़ी संख्या में लोग खड़े नजर आ रहे हैं, जो स्थानीय स्तर पर हो रही जनसुनवाई व्यवस्था से पूरी तरह असंतुष्ट हैं।

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