भोपाल:कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ना मरीज के लिए जितना शारीरिक रूप से मुश्किल है, उससे कहीं बड़ी चुनौती उनके परिवारों के सामने इलाज का भारी-भरकम खर्च उठाना बन गया है। कीमोथेरेपी के इंजेक्शन, इम्यूनोथेरेपी, महंगी दवाएं और बार-बार होने वाली जांच परिवारों की वर्षों की जमा पूंजी को तेजी से खत्म कर रही हैं। कई परिवार इलाज जारी रखने के लिए कर्ज लेने, जमीन बेचने और रिश्तेदारों से आर्थिक मदद मांगने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, दूसरी ओर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण दवाओं के जेनेरिक विकल्प ब्रांडेड दवाओं की तुलना में बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हैं। एक ही साल्ट और समान डोज वाली इन दवाओं की कीमतों में कई गुना का अंतर है।
📊 अध्ययन में खुलासा: कैंसर मरीज के इलाज का 45 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ दवाओं पर होता है खर्च
इलाज का आर्थिक बोझ:
- प्रत्यक्ष चिकित्सा खर्च: देश के सात बड़े कैंसर अस्पतालों में 12,148 मरीजों पर किए गए एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, एक कैंसर मरीज का सालाना औसत प्रत्यक्ष चिकित्सा खर्च 3,31,177 रुपये आंका गया है।
- अस्पताल और ओपीडी खर्च: अस्पताल में भर्ती होने पर एक बार में औसतन 39,085 रुपये और ओपीडी के एक परामर्श पर 8,053 रुपये खर्च होते हैं। इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के कुल प्रत्यक्ष खर्च में अकेले दवाओं की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है, जबकि ओपीडी उपचार में जांच पर 36.4 फीसदी राशि खर्च होती है।
💰 ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमतों में भारी अंतर; हजारों का इंजेक्शन कम दाम में उपलब्ध
कीमतों की तुलना:
- डाक्सोरूबिसिन इंजेक्शन: जन औषधि केंद्र पर 50 एमजी का यह इंजेक्शन 150 से 300 रुपये के आसपास मिल जाता है, जबकि प्रमुख ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर इसकी कीमत 3 हजार से 12 हजार रुपये के बीच है।
- पैलिटैक्सील इंजेक्शन: स्तन, फेफड़े और अंडाशय के कैंसर में प्रयुक्त होने वाला यह इंजेक्शन जन औषधि में 400 से 800 रुपये का है, जबकि बाजार में ब्रांडेड रूप में यह 2 हजार से 15 हजार रुपये तक बिकता है।
- ट्रैस्टुजुमाब और रीतुक्सीमैब: ब्रेस्ट कैंसर में काम आने वाला ट्रैस्टुजुमाब इंजेक्शन जन औषधि में 8 हजार से 15 हजार रुपये तक उपलब्ध है, जबकि ब्रांडेड बाजार में यह 40 से 60 हजार रुपये तक बेचा जाता है। इसी तरह रीतुक्सीमैब इंजेक्शन जन औषधि में 3 से 8 हजार रुपये और ब्रांडेड कंपनियों के पास 20 से 50 हजार रुपये के बीच है।
⚙️ सरकार का बड़ा कदम: 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित
प्रशासनिक निर्देश और मूल्य नियंत्रण:
- नया मूल्य नियंत्रण: मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सुदाम पी खाड़े ने जानकारी दी कि महंगी दवाओं के मार से मरीजों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित कर दिया है।
- लागू होने की तिथि: इसमें पेम्ब्रोलिजुमैब, डुरवालुमैब, ओसिमर्टिनिब और बेवाकिजुमैब जैसी बेहद महंगी दवाएं शामिल हैं। इस फैसले से कुछ दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 70 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है। इसके तहत 543 ब्रांड्स की संशोधित कीमतें जारी की गई हैं, जो 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। ओवर-रेटिंग की शिकायत मिलने पर फार्मा कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।
🛍️ जन औषधि केंद्रों की पहुंच और जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता
आरटीआई कार्यकर्ता के आंकड़े:
- नेटवर्क और उपलब्धता: आरटीआई कार्यकर्ता प्रदीप खंडेलवाल के अनुसार, जून 2026 तक देशभर में 20,149 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे थे, जहां 2,110 दवाइयां और 315 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- बचत और गुणवत्ता: यहां मिलने वाली जेनेरिक दवाएं सामान्य ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 फीसदी तक सस्ती होती हैं। उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन्हें निर्धारित मानकों के तहत कड़े परीक्षण से गुजारा जाता है।

More Stories
Cleanliness Drive Strike Updates: न्यू मार्केट के व्यापारियों ने खुद लगाई सड़कों पर झाड़ू, वाल्मीकि समाज ने भी दिया समर्थन
Public Dissatisfaction News 2026: रतलाम कलेक्टर द्वारा बदले गए जनसुनवाई सिस्टम से जनता परेशान, कलेक्ट्रेट के बाहर लग रही कतारें
Encounter SP Dharmraj Meena Details: चार जिलों में फैला था कल्ली गुर्जर का आतंक, हथियार और कारतूस के साथ साथी भी दबोचा गया