November 5, 2026

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Health Benefits Market Updates: स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और धार्मिक परंपराओं ने बढ़ाई पारंपरिक धातुओं की मांग

महाकाल की नगरी उज्जैन का ऐतिहासिक बर्तन बाजार एक बार फिर पीतल और तांबे की चमक से पूरी तरह गुलजार हो चुका है। लगभग 100 साल पुराने इस बाजार में बर्तनों का कारोबार आज भी उज्जैन की मुख्य व्यापारिक पहचान बना हुआ है, जिसका केंद्र मुख्य रूप से उज्जैन का पटनी बाजार है। एक दौर ऐसा भी आया था जब स्टील और एल्युमिनियम के आधुनिक बर्तनों ने बाजार में अपनी मजबूत पैठ बना ली थी और पीतल-तांबे की मांग में कमी आने लगी थी, लेकिन अब बदलती जीवनशैली, निवेश के बढ़ते विकल्प, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और धार्मिक परंपराओं ने इन पारंपरिक धातुओं के सुनहरे दिन फिर से लौटा दिए हैं।

💰 त्योहारी सीजन में रोजाना 4 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है कारोबार

बाजार का दायरा और बिक्री:

  • त्योहारी मांग: धनतेरस और दीपावली के पावन पर्व के दौरान पीतल के दीपक, समई, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, कलश और तांबे के बर्तनों की खरीदारी में भारी उछाल आ जाता है।
  • दैनिक कारोबार: स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, इस फेस्टिव सीजन के दौरान पूरे बाजार का रोजाना का कारोबार 4 से 5 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का ही नतीजा है कि अब आधुनिक रसोईघरों (किचन) में भी तांबे और पीतल के बर्तन दोबारा सजने लगे हैं।
🔄 बर्तन बाजार में बदला ट्रेंड; विनिर्माण और देशव्यापी सप्लाई का केंद्र है उज्जैन

व्यापारियों के अनुभव और आंकड़े:

  • दुकानों का नेटवर्क: बर्तन व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय मित्तल के अनुसार, उज्जैन के पटनी बाजार में बर्तनों की बड़ी संख्या में दुकानें हैं और पूरे शहर में लगभग 250 दुकानें संचालित हो रही हैं। बीते कुछ वर्षों में तांबे व पीतल की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है।
  • स्क्रैप से लेकर भाव तक: पटनी बाजार में मेटल्स की दुकान चलाने वाले यश कसेरा बताते हैं कि उनकी दुकान वर्ष 1946 से संचालित हो रही है। कोरोना काल के आसपास पीतल का स्क्रैप भाव करीब ₹250 प्रति किलो था, जो अब बढ़कर ₹850 प्रति किलो हो जाने के बावजूद इसकी मांग लगातार बनी हुई है। सोने-चांदी की तरह तांबे और पीतल में भी अब लोग निवेश के लिहाज से रुचि ले रहे हैं। उज्जैन केवल बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि बर्तनों के निर्माण का भी बड़ा गढ़ है, जहां से माल पूरे देश में सप्लाई होता है।
🪔 दीपावली पर विशेष आइटम्स की धूम; समई, मूर्तियां और पूजा सेट की बंपर बिक्री

विशेष उत्पाद और मांग:

  • पारंपरिक वस्तुएं: व्यापारी अश्विन कसेरा बताते हैं कि पिछले 20 वर्षों से वे इस कारोबार से जुड़े हैं। दीपावली के खास मौके पर पीतल की समई, पारंपरिक दीपक, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और अष्ट लक्ष्मी पात्र की मांग सबसे ज्यादा रहती है।
  • नियमित उपयोग: इसके अलावा तांबे के जग, बोतल, लोटे, परात और मंदिरों में उपयोग होने वाले पूजा सेटों की भी भारी मांग है। सामान्य दिनों में जहां एक दुकान का रोजाना कारोबार 20 से 30 हजार रुपये होता है, वहीं सीजन के दौरान यह बढ़कर 1 से 1.5 लाख रुपए प्रतिदिन तक पहुंच जाता है।
🩺 स्वास्थ्य लाभ और धार्मिक मान्यताएं: डॉक्टर और पंडितों की राय

आयुर्वेदिक और पारंपरिक महत्व:

  • स्वास्थ्य लाभ: जिला चिकित्सा अधिकारी जितेंद्र शर्मा के अनुसार, तांबे और पीतल के बर्तनों का उपयोग भारतीय खानपान की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। तांबे के पात्र में रखा पानी पीने और पारंपरिक धातुओं के इस्तेमाल से पाचन तंत्र (Digestion) मजबूत होता है। इसके विपरीत, एल्युमिनियम और प्लास्टिक शरीर में माइक्रोपार्टिकल्स छोड़ते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
  • धार्मिक मान्यता: पंडित दर्पण शर्मा बताते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरी पीतल का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसीलिए धनतेरस पर पीतल खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। वहीं ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बे वाला के अनुसार, दीपावली पूजन में स्वर्ण, रजत और ताम्र (तांबा) धातुओं का विशेष महत्व है, जो सुख-समृद्धि और आयु वृद्धि का प्रतीक हैं।
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