October 16, 2026

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Narmadapuram Organ Donation: सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुई विलासा शर्मा के अंगों से बची 3 जानें, CM मोहन यादव ने परिजनों को सराहा

नर्मदापुरम। “पत्नी को खोने का दुख असहनीय है, लेकिन उनके अंगों से यदि किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन मिल सके, तो यह मेरे लिए सबसे बड़े संतोष की बात होगी।” यह भावुक और प्रेरणादायी शब्द हैं नर्मदापुरम के बनखेड़ी अंतर्गत ग्राम खापाखुर्द निवासी अखिलेश शर्मा के, जिनकी 30 वर्षीय पत्नी विलासा तांशी (शिवानी) शर्मा ने सड़क हादसे के बाद अपनी जान गंवाकर तीन जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दान दिया है। एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) में चिकित्सकों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों की सहमति से उनके अंगदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके बाद जब महिला का पार्थिव शरीर उनके गृह ग्राम पहुँचा, तो पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें पूरे सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर अंतिम विदाई दी गई।

🏍️ सलकनपुर देवी मंदिर जाते वक्त हुआ था सड़क हादसा, डॉक्टरों ने घोषित किया था ब्रेन डेड

मिली जानकारी के अनुसार, विलासा तांशी शर्मा कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल पर सवार होकर सलकनपुर स्थित प्रसिद्ध देवी मंदिर में दर्शन करने जा रही थीं। इसी दौरान बुधनी के पास सलकनपुर मार्ग पर हुए एक दर्दनाक हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आ गई थीं। दुर्घटना के तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और अंततः चिकित्सकों की टीम ने उन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर पति अखिलेश शर्मा व परिवार ने दुख की इस कठिन घड़ी में भी हिम्मत दिखाते हुए अंगदान का ऐतिहासिक फैसला लिया।

❤️ दोनों किडनी और लिवर से बची 3 लोगों की जान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिजनों की संवेदनशीलता को सराहा

विलासा शर्मा के परिजनों की लिखित सहमति के बाद एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी दोनों किडनी और लिवर को सुरक्षित निकालकर जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया पूरी की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस पहल की सराहना करते हुए लिखा कि नर्मदापुरम की बेटी विलासा शर्मा के अंगदान से तीन जिंदगियों को अनमोल उपहार मिला है। उन्होंने कहा कि असहनीय दुख की घड़ी में परिजनों द्वारा दिखाई गई यह संवेदनशीलता समाज के लिए परोपकार की अद्भुत मिसाल है। राज्य सरकार की पहल पर पैतृक गांव में दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर से यह भी स्पष्ट होता है कि अंगदान को लेकर अब ग्रामीण इलाकों में भी सकारात्मक और जागरूकता भरा बदलाव आ रहा है।

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