October 11, 2026

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MP Tourism News: कामकंदला का रंगशाला और ऐतिहासिक किला बना उपेक्षा का शिकार, ग्रामीणों ने की पर्यटक स्थल बनाने की मांग

लैला-मजनू और हीर-रांझा की प्रेम कहानियों की तरह ही मध्य प्रदेश के कटनी जिले से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक नगरी पुष्पावती (वर्तमान बिलहरी) में एक अनूठी प्रेम दास्तान दफन है। इतिहासकार राजेंद्र सिंह ठाकुर बताते हैं कि सदियों पहले इस नगरी में नृत्यकला में निपुण बेहद खूबसूरत राजनर्तकी कामकंदला रहती थी। नगर में वीणा वादन के उस्ताद माधवानल के आगमन के बाद दोनों के बीच अगाध प्रेम हो गया। हालांकि, राजा के कोपभाजन के कारण माधवानल को राज्य से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद वे न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की शरण में उज्जैन पहुंचे।

👑 सम्राट विक्रमादित्य ने ली थी प्यार की अग्निपरीक्षा: झूठी खबर पर त्यागे प्राण, भगवान शिव की कृपा से पुनः हुआ मिलन

सम्राट विक्रमादित्य ने दोनों के सच्चे प्रेम की परीक्षा लेने के लिए पुष्पावती पर चढ़ाई की और युद्ध के दौरान यह झूठी खबर फैला दी कि माधवानल मारे गए हैं। यह सुनते ही वियोग में कामकंदला ने अपने प्राण त्याग दिए और जब यह बात माधवानल को पता चली तो उन्होंने भी दम तोड़ दिया। दोनों के इस निष्छल और आत्मिक प्रेम को देखकर विक्रमादित्य को गहरा पश्चाताप हुआ। लोककथाओं के अनुसार, सम्राट ने भगवान शिव और बेतालों की मदद से दोनों प्रेमियों को पुनः जीवित कराया और उनका सुखद मिलन कराया। इस जगह को क्षेत्र में ‘कटनी का ताजमहल’ भी कहा जाता है।

🏚️ बदहाली के आंसू रो रही 11वीं सदी की अमूल्य धरोहर: ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने की टूरिस्ट स्पॉट बनाने की मांग

इतिहास की यह अमर कहानी आज भी बिलहरी स्थित कामकंदला किले और रंगशाला की खंडहरनुमा दीवारों में गूंजती है, लेकिन देखरेख के अभाव में 11वीं सदी की यह ऐतिहासिक धरोहर अब ढहने के कगार पर है। जनपद सदस्य संतोष कुमार माझी और स्थानीय निवासियों ने प्रदेश सरकार व पुरातत्व विभाग से गुहार लगाई है कि इस स्थल का जीर्णोद्धार कर इसे आधिकारिक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। इससे न केवल ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण होगा और असामाजिक तत्वों का डेरा खत्म होगा, बल्कि राज्य सरकार को राजस्व की भी प्राप्ति होगी।

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