मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहद सराहनीय और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब वक्फ संपत्तियों से होने वाली आमदनी का उपयोग गरीब और यतीम बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए किया जाएगा। इस सकारात्मक पहल की शुरुआत राजधानी भोपाल से हो चुकी है, जहाँ शुरुआती चरण में करीब 289 मेधावी छात्र-छात्राओं की स्कूल और इंस्टीट्यूट की फीस के रूप में 21 लाख 60 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। बोर्ड की ओर से प्रत्येक चयनित छात्र को 10 हजार रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
💰 ड्रॉपआउट रोकने के लिए वक्फ बोर्ड उठा रहा बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का यह नवाचार उन बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है जो आर्थिक तंगी या परिवार न होने के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने (ड्रॉपआउट) को मजबूर हो जाते हैं। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनावर खान ने बताया कि ऐसे मेधावी यतीम बच्चे जो पैसों की कमी के कारण आगे नहीं पढ़ पा रहे हैं, उनकी शिक्षा किसी भी कीमत पर नहीं रुकनी चाहिए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यतीमखाने की संपत्तियों से अर्जित आय को बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करने का निर्णय लिया गया है। 13 अक्टूबर को यह सहायता राशि छात्रों को आधिकारिक रूप से वितरित की जाएगी।
📝 पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 289 बच्चों का हुआ चयन, आगे पूरे प्रदेश में लागू होगी योजना
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ देने के लिए पहले सार्वजनिक रूप से विज्ञप्ति जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों की गहन जांच-पड़ताल करने के बाद 289 बच्चों को इसके योग्य पाया गया, जिन्हें अब फीस की यह राशि दी जाएगी। वक्फ बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि वक्फ संपत्तियों पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर उनकी आय बढ़ाई जाएगी और भोपाल के बाद इस कल्याणकारी योजना को मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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