शहर में बिजली व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जबलपुर की कई कॉलोनियों और बस्तियों में आज भी बिजली की लाइनें बांस-बल्ली के सहारे चल रही हैं। स्थिति यह है कि कहीं जर्जर खंभों पर तारों के खतरनाक गुच्छे लटक रहे हैं, तो कहीं मीटर सड़क किनारे खुले में टंगे हुए हैं। कई इलाकों में तार इतने नीचे हैं कि राहगीरों के लिए हर वक्त करंट का गंभीर खतरा बना रहता है।
⚠️ आरडीएसएस योजना के बाद भी हाल बेहाल: ट्रांसफार्मर के पास व्यावसायिक गतिविधियां और खुले फ्यूज
केंद्र सरकार की आरडीएसएस जैसी योजनाओं में सब-स्टेशन और बिजली लाइनों के सुधार पर भारी राशि खर्च होने के बावजूद 50 से अधिक कॉलोनियों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। शहर में कई जगहों पर ट्रांसफार्मर के ठीक नीचे व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। आंबेडकर चौक-घमापुर मार्ग पर ब्यौहारबाग के पास सड़क किनारे खतरनाक रूप से ट्रांसफार्मर के नीचे खुले फ्यूज लगे हैं, जहां से गुजरने वाली भीड़ और बच्चों की पहुंच के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
🔌 सड़क किनारे लटके मीटर और केबल: पाटन रोड से लेकर करमेता तक पसरी है लापरवाही
पाटन रोड करमेता में ग्रैंड आईटीआई के पीछे रहवासी क्षेत्र इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां स्थायी कनेक्शन न मिलने से टीसी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के मीटर सड़क किनारे झूल रहे हैं। इसके अलावा करमेता, मेडिकल के आगे शास्त्री नगर, महाराजपुर बायपास और कछपुरा के गणेश नगर में भी बिजली लाइनें बांस-बल्ली के सहारे ही टिकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था लंबे समय से चल रही है, लेकिन बिजली कंपनी द्वारा स्थायी पोल लगवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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