September 29, 2026

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Asian Games Medal Tally: ट्रैप शूटिंग में भारतीय तिकड़ी ने देश का नाम किया रोशन, चीन ने जीता गोल्ड मेडल

एशियन गेम्स 2026 के 10वें दिन भारत की झोली में पहला मेडल शूटिंग के इवेंट में गिरा. भारत ने ये मेडल महिलाओं की ट्रैप शूटिंग के टीम इवेंट में जीता. भारत की मनीषा कीर, नीरू ढांढा और आशिमा अहलावत की तिकड़ी ने महिला ट्रैप शूटिंग के टीम इवेंट में सिल्वर मेडल पर निशाना लगाया. इन तीनों ने मिलकर 328 का स्कोर किया. वहीं इस इवेंट का गोल्ड मेडल चीन के शूटर्स के नाम रहा, जिन्होंने 346 स्कोर किया.

नीरू ढांढा ने अकेले 118 का स्कोर किया

अब सवाल है भारतीय महिला शूटर्स की तिकड़ी ने 328 का स्कोर कर किया कैसे? इसमें सबसे बड़ा योगदान नीरू ढांढा का रहा जिन्होंने अकेले 118 अंक स्कोर किए. नीरू ढांढा अपने इस स्कोर के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहीं, जिसके चलते उन्हें महिला ट्रैप शूटिंग के इंडिविजुअल इवेंट के फाइनल में भी जगह मिल गई.

आशिमा ने 106 और मनीषा ने 104 स्कोर किया

नीरू ढांढा के अलावा आशिमा अहलावत ने 106 अंक स्कोर किए वहीं मनीषा कीर ने 104 अंक हासिल किए. अब इस स्कोर के साथ ये दोनों नीरू ढांढा की तरह इंडिविजुअल फाइनल में तो जगह नहीं बना पाईं. लेकिन, उनका योगदान टीम इवेंट में भारत को सिल्वर मेडल जिताने के लिए काफी रहा.

आशिमा अहलावत 16वें स्थान पर जबकि मनीषा कीर 23वें स्थान पर रही थीं. यही वजह है कि वो दोनों इंडिविजुअल फाइनल के लिए क्वालिफाई करने वाली टॉप 8 शूटर्स में अपनी जगह पक्की नहीं बना सकीं.

मछुआरे की बेटी हैं मनीषा

नीरू ढांढा किसान की बेटी हैं. वहीं आशिमा को ट्रैप शूटिंग के मंच पर लाकर खड़ा करने में उनकी मां के बलिदानों का बड़ा योगदान रहा है. लेकिन, इन तीनों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है मनीषा कीर के संघर्ष की कहानी, जो कि भोपाल के एक मछुआरे की बेटी हैं.

मछली पकड़ने-बेचने में पिता का बंटाया हाथ

मनीषा कीर की चर्चा भले ही अभी सिल्वर मेडल जीतने को लेकर हो रही हो. लेकिन, एक समय उन्हें अपने 10 सदस्यीय परिवार का पेट पालने के लिए पिता का हाथ बंटाना पड़ता था. वो अपने पिता के साथ मछली पकड़ने और बेचने का काम करती थीं.

बड़ी बहन के चलते मनीषा बनी शूटर!

उन्हें शूटिंग से रूबरू कराने में उनकी बड़ी बहन का योगदान रहा है, जो उन्हें उस ट्रायल तक ले गईं, जहां मनीषा के टैलेंट पर भारत के पूर्व ओलंपियन शूटर मनशेर सिंह की नजर पड़ी. उसके बाद मनीषा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब जो है वो इतिहास में दर्ज है.

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