भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक विदाई की तारीख नजदीक है, इसके बावजूद प्रदेश के कई इलाकों में झमाझम बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब (डीप डिप्रेशन) और उत्तर प्रदेश के ऊपर बना चक्रवाती हवाओं का घेरा इस बारिश का मुख्य कारण है। मौसम केंद्र भोपाल ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों में भारी से अति भारी बारिश का ऑरेंज/येलो अलर्ट जारी किया है। इससे पहले बुधवार को भी प्रदेश के इटारसी, खरगोन, खंडवा, टीकमगढ़ सहित कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई।
☔ प्रदेश में अगले 3 दिन सक्रिय रहेगा मानसून: अब तक कोटे की 92 प्रतिशत बारिश दर्ज
सामान्यतः देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है।
इस लिहाज से देखें तो मानसून के विदा होने में अब महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं। हालांकि, विदाई से पहले मानसून पूरे मध्य प्रदेश को तरबतर कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, “प्रदेश में तेज बारिश कराने वाला एक मजबूत सिस्टम सक्रिय है, जिसका असर अगले 3 दिनों तक बना रहेगा। इस दौरान मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जिलों में मूसलाधार बारिश होने की संभावना है।” मध्य प्रदेश में अब तक सीजन की औसतन 34.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो कि कुल कोटे का लगभग 92 प्रतिशत है।
🚨 इन 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी: 40 से अधिक जिलों में छाए रहेंगे बादल
मौसम केंद्र भोपाल द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार छतरपुर, पन्ना, सतना, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।
इसके अलावा राजधानी भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
🌵 पश्चिमी मध्य प्रदेश के ये जिले रहे पीछे: भोपाल में पिछले 5 सालों से टूट रहे रिकॉर्ड
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों की तुलना में पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में इस बार काफी कम बारिश दर्ज की गई है।
इंदौर, देवास, धार, हरदा, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से लेकर 49% तक कम बारिश हुई है। दूसरी ओर, भोपाल में पिछले 5 वर्षों से लगातार रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है। सितंबर महीने में यहाँ बारिश का सामान्य औसत 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 सालों से इस महीने में कोटे से कहीं अधिक बारिश दर्ज की जा रही है।
💨 3 मौसमी प्रणालियों के असर से तेज हवाओं के साथ होगी बारिश: वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक की रिपोर्ट
भोपाल के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. अरुण शर्मा ने बताया, “आने वाले दिनों में प्रदेश के मौसम में बड़े बदलाव के पीछे 3 प्रमुख मौसमी प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के आसपास बना गहरा अवदाब उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से तेज हवाएं चलने और बारिश की तीव्रता बढ़ने के आसार हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा (Withdrawal Line) भी आगे बढ़ रही है, जबकि मध्य क्षोभमंडलीय स्तर पर एक पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ रेखा के रूप में मौजूद है। इन तीनों वेदर सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

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