मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक बेहद आकर्षक और विशाल ‘सनातन राखी’ तैयार की गई है, जिसका आकार 40×40 इंच है। मातृश्री पालरेचा परिवार द्वारा बनाई गई इस खूबसूरत राखी को शहर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के साथ-साथ अलीजा सरकार हनुमान मंदिर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भगवान को अर्पित किया गया है। इसके अलावा उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर, चिंतामन गणेश और इंदौर के छोटा गणपति को भी यह विशेष राखी समर्पित की गई है। इस राखी को देखने के लिए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक मालिनी गौड़ और पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता सहित कई गणमान्य नागरिक और शहरवासी पहुंचे थे। इस राखी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय चेतना और सनातन संस्कृति के प्रतीकों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रभाव की थीम पर तैयार किया गया है।
🕒 रक्षाबंधन का पावन पर्व: भद्रा मुक्त योग में दिनभर बांधी जा सकेगी राखी
भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार श्रावण पूर्णिमा भद्रा रहित है, जिसके कारण दिनभर राखी बांधी जा सकेगी। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। इस बार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाने के कारण किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं आया है। ज्योतिर्विद श्यामप्रसाद तिवारी के अनुसार, पंचांग में रक्षाबंधन के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है, और उदयातिथि के मान से पूरे दिन राखी बांधने का सिलसिला जारी रहा।
⭐ राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया समय
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधने के लिए कुछ विशेष मुहूर्त बेहद शुभ माने गए हैं:
- सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 6:23 से 09:48 बजे तक।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:05 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:57 से 07:19 बजे तक।
- चौघड़िया मुहूर्त: लाभ (सुबह 07:57 से 09:31), अमृत (सुबह 09:32 से 11:05), शुभ (दोपहर 12:40 से 02:14) और चर (शाम 05:22 से 06:57)।
- राहुकाल (वर्जित): सुबह 11:06 से दोपहर 12:40 बजे तक इस समयावधि में राखी बांधने से बचना चाहिए।
🌕 चंद्रग्रहण का प्रभाव: भारत में दृश्यता न होने से पूरी तरह बेअसर रहा सूतक
पुजारी केशव गुरु के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण भी लगा, लेकिन यह भारत में कहीं भी नजर नहीं आया। चूंकि ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक उसकी स्थानीय दृश्यता से जुड़ा होता है, इसलिए इंदौर और देश के अन्य हिस्सों में इसकी दृश्यता न होने के कारण इसका कोई भी धार्मिक या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। शुक्रवार और पूर्णिमा का यह दुर्लभ संयोग पारिवारिक संबंधों में मिठास और प्रगाढ़ता लाने वाला साबित हुआ है, क्योंकि ज्योतिषीय गणना में शुक्रवार को सुख, प्रेम और समृद्धि का कारक माना गया है।

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