अमेरिका ने सीरिया को अपने स्टेट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म यानी आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से आधिकारिक तौर पर हटा दिया है. सीरिया तकरीबन 45 साल तक इस सूची में रहा. अमेरिका का यह कदम सीरिया के लिए बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक बदलाव माना जा रहा है.इस सूची में होने के चलते सीरिया पर कई तरह के वित्तीय और व्यापारिक प्रतिबंध लागू थे.
अब इस दर्जे को हटाए जाने से विदेशी निवेश, वित्तीय लेन-देन और आर्थिक गतिविधियों के लिए रास्ता आसान होने की उम्मीद है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि सीरिया की नई सरकार ने ISIS, अल-कायदा और दूसरे आतंकी संगठनों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
1979 से आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में था सीरिया
अमेरिका ने सीरिया को पहली बार 1979 में स्टेट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म की सूची में शामिल किया था. साढ़े चार दशक तक सीरिया इस सूची में बना रहा. अब असद सरकार के पतन और नई सरकार के साथ अमेरिका के रिश्तों में बदलाव के बाद वॉशिंगटन ने अपना रुख बदल दिया है.
ट्रंप ने जुलाई में शुरू की थी सीरिया को इस सूची से हटाने की प्रक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को सीरिया को इस सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी. इसके बाद अमेरिकी कांग्रेस को 45 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया का मौका दिया गया. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 अगस्त को सीरिया को आधिकारिक तौर पर सूची से हटा दिया गया.
अब इस लिस्ट में कौन-कौन से देश?
सीरिया के बाहर होने के बाद अमेरिका की स्टेट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म सूची में अब सिर्फ तीन देश हैं. ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया बचे हैं.इस सूची में शामिल देशों पर अमेरिका की ओर से आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों का असर पड़ सकता है. यह उन देशों की अर्थव्यवस्था के सही साबित नहीं होती हैय.
सीरिया के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
सीरिया लंबे समय से गृहयुद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों और आतंकवाद प्रायोजक देश के दर्जे ने विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए सीरिया के साथ कारोबार करना मुश्किल बनाया था. अब इस बाधा के हटने से निवेश और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है. विश्व बैंक ने 2025 में सीरिया के पुनर्निर्माण की लागत करीब 216 अरब डॉलर आंकी थी.

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