उज्जैन: आंखों में आंसू, चेहरे पर गुस्सा और प्रशासन से एक ही सवाल—हमारा स्कूल क्यों छीना जा रहा है? 14 अगस्त को उज्जैन में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सराफा की छात्राएं जब सड़क पर उतरीं, तो यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। छात्राएं सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचीं और स्कूल को शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी स्थित सांदीपनि स्कूल में शिफ्ट किए जाने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। विरोध प्रदर्शन के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े और फिलहाल शिफ्टिंग पर रोक लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की बात कही गई है।
🤝 सांसद, विधायक और कलेक्टर पहुँचे छात्राओं के बीच, दिया आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए 18 अगस्त को सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति कलावती यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय अग्रवाल और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह खुद स्कूल पहुँचे। छात्राओं के साथ करीब 40 मिनट चली चर्चा के बाद उन्हें आश्वासन दिया गया कि जब तक कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक स्कूल वर्तमान भवन से ही संचालित होता रहेगा। इसके अलावा छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात करने और बेहतर सड़क व परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया है।
📉 36 साल में चार बार बदला ठिकाना, छात्राओं की संख्या में आई भारी गिरावट
विद्यालय के प्राचार्य मुकेश त्रिवेदी और इतिहास के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्कूल 1956 से लेकर अब तक 36 सालों में चार बार अपना स्थान बदल चुका है। कभी इस स्कूल में 3000 से अधिक छात्राएं पढ़ा करती थीं, लेकिन बार-बार स्थान परिवर्तन और अन्य कारणों से यह संख्या घटकर अब मात्र 415 रह गई है। पूर्व में स्कूल महाराजवाड़ा और अन्य स्थानों पर संचालित होता रहा है, जिसे बाद में चारधाम मंदिर के पास नए भवन में लाया गया था। अब 10 अगस्त 2026 को इसे दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने के आदेश जारी होने के बाद छात्राओं और अभिभावकों में एक बार फिर भविष्य को लेकर चिंता और आक्रोश देखने को मिला है।

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