August 18, 2026

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Bhopal Green Corridor News: एम्स से बंसल अस्पताल तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर, अंगदान कर परिवार ने पेश की अनूठी मिसाल

जीवन और मृत्यु के बीच का सफर कभी-कभी किसी दूसरे परिवार के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बन जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक और संवेदनशील मामला राजधानी के एम्स (AIIMS) अस्पताल में सामने आया है। बैतूल जिले के रहने वाले 24 वर्षीय सुनील बोसमाकर एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए एम्स भोपाल लाया गया था। डॉक्टरों द्वारा तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका, और अंततः निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया। इस असीम दुख की घड़ी में उनके परिजनों ने जो महान फैसला लिया, उसने सुनील की मृत्यु को भी एक जीवनदायी विरासत में बदल दिया।

🚑 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एम्स से बंसल अस्पताल पहुंचाई गई किडनी, चार सफल ब्रेन-डेड डोनेशन

परिजनों की सहमति से अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके तहत सुनील के शरीर से लिवर और दोनों किडनियां निकाली गईं। इनमें से लिवर और एक किडनी का सफल ट्रांसप्लांट एम्स भोपाल में ही जरूरतमंद मरीजों के लिए किया गया, जबकि दूसरी किडनी को शाहपुरा स्थित बंसल अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए आवंटित किया गया। समय की महत्ता को देखते हुए एम्स से बंसल अस्पताल तक ट्रैफिक पुलिस और चिकित्सा दलों के आपसी समन्वय से एक विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार किया गया, जिसकी मदद से अंग को सुरक्षित और अत्यंत कम समय में गंतव्य तक पहुँचाया गया। एम्स के अधिकारियों के अनुसार, संस्थान में ब्रेन-डेड दाता से हुआ यह चौथा सफल अंगदान है।

❤️ एक परिवार का निस्वार्थ फैसला बना मिसाल, डॉक्टरों और प्रशासन ने जताया आभार

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. केतन मेहरा ने परिवार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इस कठिन निर्णय ने एक बड़ी त्रासदी को जीवन के नए प्रकाश में बदल दिया है। अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों ने सुनील के परिवार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार के निस्वार्थ और संवेदनशील निर्णय देश में ऑर्गन डोनेशन (अंगदान) का इंतजार कर रहे हजारों मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक नई उम्मीद जगाते हैं।

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