आज के व्यस्त समय में यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशन पर समय पर पहुंचना और वहां से सुरक्षित बाहर निकलना बेहद जरूरी है, लेकिन भोपाल के विश्वस्तरीय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर प्रीमियम ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय यही सफर जी का जंजाल बन जाता है। वंदे भारत, शताब्दी और जनशताब्दी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के आने-जाने के दौरान प्लेटफॉर्म नंबर-1 के बाहर मुख्य मार्ग पर करीब 20 से 30 मिनट तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके कारण ट्रेन पकड़ने आने वाले यात्रियों और उन्हें छोड़ने या लेने आने वाले परिजनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
🚗 20-30 मिनट तक फंसे रहते हैं वाहन, बढ़ता प्रदूषण और पार्किंग की गंभीर समस्या
ट्रेनों के आवागमन के समय स्टेशन के बाहरी परिसर में वाहनों का अत्यधिक दबाव बढ़ जाता है, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह धीमा हो जाता है। जाम में फंसे होने के कारण कई वाहनचालक अपनी गाड़ियां चालू रखते हैं, जिससे ईंधन की बर्बादी के साथ-साथ सड़क पर धुआं और प्रदूषण भी तेजी से बढ़ता है। इसके अलावा मेन रोड पर अनाधिकृत रूप से खड़े रहने वाले ऑटो और कैब भी ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ते हैं। स्टेशन परिसर में सीमित एग्जिट मार्ग, स्पष्ट पिकअप-ड्रॉप पॉइंट का अभाव और पार्किंग की नाकाफी व्यवस्था इस समस्या को और गंभीर बना देती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि हयात की तरफ बंद पड़े गेट को खोल दिया जाए, तो यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
🛠️ ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए प्रमुख समाधान और आगे की राह
इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए यात्रियों और समिति सदस्यों द्वारा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:
- स्टेशन के बाहर एक अलग और सुव्यवस्थित पिकअप-ड्रॉप जोन बनाया जाए।
- प्रीमियम ट्रेनों के आवागमन के समय यातायात नियंत्रण के लिए अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात की जाए।
- ऑटो और कैब चालकों के लिए एक निर्धारित स्टैंड तय किया जाए।
- स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार के बाहर ‘नो-वेटिंग ज़ोन’ घोषित किया जाए।
- नियमों का उल्लंघन करने और गलत जगह वाहन पार्क करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
इस मुद्दे को पहले भी रेलवे अधिकारियों और जीएम के साथ बैठकों में उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। यात्रियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन को अपनी आंतरिक व्यवस्था में आवश्यक बदलाव कर इस समस्या का जल्द समाधान निकालना चाहिए।

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