सिवनी : मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू के इतिहास में एक अनूठा मामला सामने आया है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से एक खतरनाक बाघ को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है। सिवनी जिले के बरघाट-लामटा इलाके में लंबे समय से दहशत फैला रहे इस बाघ को वन विभाग के अधिकारियों ने लगभग 2 महीने की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार अपनी गिरफ्त में ले लिया। इस चुनौतीपूर्ण टाइगर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए दो बड़े टाइगर रिजर्व के 60 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों ने दो महीने तक लगातार पसीना बहाया, और अंततः आधुनिक एआई तकनीक के सहारे उन्हें इसमें बड़ी सफलता हासिल हुई।
🐅 दो महीने से वन विभाग के साथ खेल रहा था आंख-मिचौली
पेंच टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर देवप्रसाद जे. ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, “बरघाट-लामटा क्षेत्र के आसपास बसे ग्रामीण इलाकों के करीब लगातार मूवमेंट कर रहे नर बाघ (PN-103) का आधुनिक एआई कैमरों का उपयोग कर सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है।”
यह पूरा जटिल अभियान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश, डॉ. समीता राजोरा के कुशल निर्देशन में चलाया गया। इसमें पेंच टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम, बरघाट प्रोजेक्ट, लामटा प्रोजेक्ट, दक्षिण बालाघाट वन मंडल और दक्षिण सिवनी सामान्य वनमंडल के संयुक्त प्रयासों ने मिलकर काम किया। अधिकारियों का कहना है कि यह रेस्क्यू अभियान बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि जिस वन क्षेत्र में इस बाघ का मूवमेंट बना हुआ था, वह कई ग्रामीण बस्तियों से सटा हुआ था और वहाँ का भौगोलिक व दुर्गम भू-भाग इस ऑपरेशन को और अधिक पेचीदा बना रहा था।
📸 जंगल में सटीक ट्रैकिंग के लिए लगाए गए 80 अत्याधुनिक AI कैमरे
वन अधिकारियों ने आगे बताया कि इस अभियान के दौरान सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि उसी विशिष्ट क्षेत्र में लक्षित बाघ के अलावा 7 अन्य बाघ, तेंदुए, भालू और जंगली कुत्ते (जिसे स्थानीय भाषा में ‘ढोल’ कहा जाता है) भी खुलेआम घूम रहे थे।
इन तमाम कारणों से टारगेट किए गए सही बाघ की सटीक पहचान करना टीम के लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज था। इस गंभीर चुनौती से पार पाने के लिए संयुक्त दल ने पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर एक विस्तृत रणनीति तैयार की। इसके तहत जंगल के अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर लगभग 80 अत्याधुनिक एआई कैमरे लगाए गए और वन्यजीवों की सघन ट्रैकिंग की गई। विभिन्न घटनास्थलों से एकत्र किए गए डीएनए (DNA) नमूनों और इन एआई कैमरों से मिले पुख्ता सबूतों ने सही बाघ की पहचान करने में सबसे अहम भूमिका निभाई। इन्हीं ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्य प्रदेश से इस बाघ को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने व रेस्क्यू की औपचारिक अनुमति प्राप्त की गई थी।
🐘 हाथियों की मदद से दुर्गम इलाकों में चलाया गया सफल अभियान
इस वृहद रेस्क्यू ऑपरेशन में लगभग 60 वन अधिकारी और कर्मचारी लगातार दो महीने तक पूरी तरह एक्टिव रहे। दुर्गम और घने जंगलों में सुरक्षित रूप से अभियान का संचालन करने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व से दो हाथियों और पेंच टाइगर रिजर्व से एक हाथी विशेष रूप से बुलाया गया था, जिनकी मदद से टीम ने कठिन इलाकों में सर्चिंग की।
पिछले चार महीनों के दौरान इस क्षेत्र में जंगली जानवरों द्वारा इंसानों पर किए गए हमलों की घटनाओं के कारण स्थानीय ग्रामीणों में भारी डर और रोष का माहौल बना हुआ था। इस तनावपूर्ण परिस्थिति में वन अमले और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली टीम को स्थानीय जनता के गुस्से का भी सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वन कर्मियों ने अपना हौसला बनाए रखा और सभी कठिन परिस्थितियों को सफलतापूर्वक मैनेज करते हुए अंततः बाघ को सुरक्षित तरीके से बेहोश करने की प्रक्रिया पूरी कर दबोच लिया।
🌳 मेडिकल जांच के बाद अब भोपाल के वन विहार का बनेगा मेहमान
विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण और मेडिकल जांच के बाद पकड़े गए इस बाघ की उम्र लगभग 9 वर्ष आंकी गई है।
शासन और विभाग के तयशुदा नियमों व दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करते हुए इस बाघ को आगे की देखरेख के लिए राजधानी भोपाल स्थित प्रसिद्ध ‘वन विहार राष्ट्रीय उद्यान’ में सुरक्षित रूप से शिफ्ट कर दिया गया है, जहाँ वह अब वन विहार का नया मेहमान रहेगा।

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