गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल और कॉलेजों में अब वंदे मातरम की गूंज सुनाई देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सभी स्कूलों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य किए जाने का ऐलान किया है।
गोरखपुर में आज सोमवार को ‘एकता यात्रा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के हर विद्यालय और हर शिक्षण संस्थान में हम इसका गायन अनिवार्य करेंगे।” उन्होंने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश के हर नागरिक के मन में भारत माता के प्रति, अपनी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव जागृत हो सकेगा।
सीएम ने किसी का नाम लिए बगैर कहा, “कुछ लोगों के लिए आज भी भारत की एकता और अखंडता से बढ़कर उनका मत और मजहब हो जाता है। उनकी व्यक्तिगत निष्ठा महत्वपूर्ण हो जाती है। वंदे मातरम के विरोध का कोई औचित्य नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “वंदे मातरम के खिलाफ विषवमन हो रहा है। जिस कांग्रेस के अधिवेशन में 1896-97 में स्वयं गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने पूरे वंदे मातरम गायन को सुनाया था और 1896 से लेकर 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम का गायन होता था। लेकिन 1923 में जब मोहम्मद अली जौहर कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो वंदे मातरम का गायन शुरू होते ही वह उठकर चले गए। उन्होंने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। वंदे मातरम का इस प्रकार का विरोध भारत के विभाजन का दुर्भाग्यपूर्ण कारण बना था।
सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने अगर उस समय मोहम्मद अली जौहर को अध्यक्ष पद से बेदखल करके वंदे मातरम के माध्यम से भारत की राष्ट्रीयता का सम्मान किया होता तो भारत का विभाजन नहीं होता। उन्होंने दावा किया, “बाद में कांग्रेस ने वंदे मातरम में संशोधन करने के लिए एक कमेटी बनाई। 1937 में रिपोर्ट आई और कांग्रेस ने कहा कि इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारत माता को दुर्गा के रूप में, लक्ष्मी के रूप में, सरस्वती के रूप में प्रस्तुत करते हैं, इनको संशोधित कर दिया जाए।
बता दें कि सीएम योगी ने भारतरत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में सोमवार को एकता पदयात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्रगीत वंदे मातरम ने आजादी के आंदोलन में भारत की सोई हुई चेतना को जागृत किया, उसका आज फिर कुछ लोग विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति, मत या मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता। जो व्यक्ति आस्था या राष्ट्र के आड़े आए, उसे एक छोर पर रख देना चाहिए। कुछ लोगों के लिए आज भी उनका व्यक्तिगत मत और मजहब बड़ा है।
सपा के एक सासंद द्वारा वंदे मातरम गाने से इनकार करने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग जिन्ना को सम्मान देने के लिए होने वाले कार्यक्रम में तो शामिल होते हैं लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं होते।
हमारा दायित्व बनता है हम उन कारणों को ढूंढें, जो समाज को बांटने वाले हैं। जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर विभाजन नए जिन्ना को पैदा करने की साजिश का हिस्सा है। हमे ध्यान रखना होगा कि भारत के अंदर फिर से कोई जिन्ना न पैदा होने पाए। अगर जिन्ना पैदा होने का साहस करता है तो उससे चुनौती मिलने से पहले ही दफन कर देना होगा

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