April 18, 2026

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मप्र के इस गांव में रावण को मानते है देवता, रोज करते है पूजा, मंदिर में मौजूद है पाषाण प्रतिमा

विदिशा: दशहरे पर पूरे देशभर में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, लेकिन मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक ऐसा गांव भी है, जहां प्रतिदिन रावण की पूजा की जाती हैं। किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गांव के लोग मन्दिर में रावण की पूजा अर्चना करते हैं।

यहां रावण को बाबा कहकर पूजा जाता है। यहां की महिलाएं मंदिर के सामने से गुजरते वक्त आज भी घूंघट निकालती हैं, और किसी भी शुभ काम की शुरुआत रावण की पूजा से होती है।

दरअसल विदिशा जिले के नटेरन तहसील का रावण गांव। इस गांव में एक प्राचीन मंदिर है, जिसमें रावण की विशाल लेटी हुई पाषाण प्रतिमा स्थापित है। यहां रावण को बाबा कहा जाता है और देवता की तरह उनकी पूजा की जाती है। गांव के लोग मानते हैं कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत रावण बाबा की पूजा से ही करनी चाहिए। शादी विवाह से लेकर नए वाहन की खरीद तक पहला निमंत्रण रावण बाबा को दिया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन आरती, भजन और प्रसाद का आयोजन होता है। गांव की विवाहित महिलाएं मंदिर के सामने से गुजरते समय आज भी घूंघट निकालती हैं।

यहां रावण दहन का आयोजन देखने तक ग्रामीण नहीं जाते, क्योंकि उनके लिए रावण कुल देवता और प्रथम देवता हैं। गांव में प्रचलित किवदंती के अनुसार, रावण बाबा ने एक राक्षस बुद्धा को यहीं अपनी प्रतिमा बनाने को कहा था। तभी से इस पहाड़ी और मंदिर की मान्यता और भी बढ़ गई। मान्यता है कि पास के तालाब में आज भी रावण की तलवार मौजूद है। गांव के लोग कहते हैं, अगर रावण बाबा की पूजा किए बिना कोई काम शुरू किया जाए, तो वो अधूरा रह जाता है। यही वजह है कि विदिशा का ये गांव आज भी रावण को देवता मानकर पूजता है।

यहां के लोग जब भी कोई नया वाहन खरीदते हैं तो उस पर रावण और जय लंकेश शब्द जरूर लिखवाते हैं। मंदिर को लेकर कई किवदंतियां ओर मान्यताएं हैं।

दरअसल रावण गांव में रावण बाबा के मंदिर से उत्तर दिशा की और लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर एक बुद्धदेव की पहाड़ी हैं, गांव में प्रचलित है कि इस पहाड़ी पर प्राचीन काल मे बुध्दा नामक एक राक्षस रहा करता था जो रावण बाबा से युद्ध करने की इच्छा रखता था। वह जब जब लंका तक पहुँचता तो वहां की चकाचौंध देखकर उसका क्रोध शांत हो जाता था। एक दिन रावण बाबा ने राक्षस से पूछा कि तुम दरबार मे क्यों आते हो और हर बार बिना कुछ बताये चले जाते हो, तब बुद्धा
राक्षस ने कहा कि महाराज मैहर बार आपसे युद्ध की चाह लेकर आता हूं लेकिन यहां आपको देखकर मेरा क्रोध शांत हो जाता है तब रावण ने कहा कि तुम वही मेरी प्रतिमा बना लेना और उसी से युद्ध करना। तब से यह प्रतिमा यहीं पर बनी हुई है। इस रावण मंदिर के पास एक तालाब स्थित है बताया जाता है कि तालाब में रावण की तलवार अभी मौजूद है। रावण गांव में रावण बाबा मंदिर के पुजारी बताते कि यह देवताओं की तरह रावण की पूजन होती है। इस गांव में प्रथम देवता के रूप में रावण बाबा को पूजा जाता हैं। यहां प्रतिदिन दोनों समय आरती भजन प्रसाद वितरण होता है।

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