उज्जैन(डॉ हीना तिवारी): सावन का पवित्र महीना शुरू हो गया है और सावन में बाबा महाकाल के दर्शन पूजन के लिए भक्त बाबा के दरबार पहुँच रहे हैं। धार्मिक नगरी उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी धर्मपत्नी के साथ आज अलसुबह श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन करने के लिए पहुंचे।
मंदिर परिसर में पहुंचते ही मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी का स्वागत किया गया, जिससे वहां का माहौल भक्तिमय हो गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उनकी पत्नी विशेष रूप से नंदी मंडपम में आयोजित होने वाली भस्मार्ती में सम्मिलित हुए। भस्मार्ती, जिसे भगवान शिव की सबसे पवित्र और प्राचीन आरती माना जाता है, सुबह ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है। इस आरती में शामिल होने के लिए देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मुख्यमंत्री के आगमन से मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था और भी पुख्ता कर दी गई थी, लेकिन इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा से बचाना था। भस्मार्ती के दौरान डॉ. यादव और उनकी पत्नी पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान महाकालेश्वर की भक्ति में लीन दिखाई दिए।
आरती के उपरांत, डॉ. यादव ने श्री महाकालेश्वर भगवान का पूजन-अर्चन किया। यह पूजन विधि-विधान से संपन्न हुआ, जिसमें मुख्य रूप से गोपाल पुजारी आकाश पुजारी ने सहयोग किया। पूजन के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने भगवान महाकालेश्वर से प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव को बिल्व पत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी ने भी पूजन में भाग लिया, जो उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।
इस अवसर पर, मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत और सम्मान किया गया। कलेक्टर ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
इस अवसर पर कई अन्य प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर समिति के सदस्य भी उपस्थित थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों और पुजारियों से भी बातचीत की और मंदिर में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी ली। यह दौरा न केवल मुख्यमंत्री की धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को कितना महत्व देते हैं।

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