मुंबई: ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (NOTA) विकल्प के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भारत को निर्देश देने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया हैं।
हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए हैं, इसलिए नए निर्देश देने की जरूरत नही हैं।
जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस आरएम जोशी की पीठ के समक्ष सुहास वानखेड़े नामक छात्र ने एक याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि ECI को नोटा विकल्प के उपयोग के बारे में नागरिकों के बीच अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए एक ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करना चाहिए।
पीठ ने ECI की ओर से जारी मतदाता गाइड पैम्फलेट का जिक्र करते हुए कहा कि नोटा के बारे में निर्देश मोटे अक्षरों में पहले से प्रकाशित किए गए हैं। पीठ ने कहा कि नोटा का जिक्र स्पष्ट रूप से किया गया है। इसको लेकर निर्देश मोटे अक्षरों में दिए गए हैं कि नोटा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर अंतिम विकल्प के रूप में उपलब्ध है। इसमें कहा गया है कि यह पैम्फलेट मतदाताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने के लिए तस्वीर के साथ उपलब्ध है।
कोर्ट ने कहा कि ECI और राज्य चुनाव आयोग दोनों ने लोगों को उनके मतदान के अधिकार और नोटा के विकल्प के बारे में जागरूक करने के लिए कदम उठाए हैं और इसलिए कोई और निर्देश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इस तरह की याचिका लगाकर कोर्ट का समय बर्बाद कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि याचिका लगाने वाला छात्र था, इसलिए उस पर जुर्माना नहीं लगाया गया।

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