April 21, 2026

News Prawah

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माफिया व पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को आजीवन कारावास की सजा दो लाख ₹ का अर्थदंड

वाराणसी: उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को आज फर्जी शस्त्र लाइसेंस से जुड़े एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वाराणसी की एमपी एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को मुख्तार अंसारी को 36 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया था। इस मामले में पूर्व विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 466/120B, 420/120, 468/120 और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

वाराणसी के एमपी एमएलए कोर्ट में जज अवनीश गौतम की अदालत ने माफिया मुख्तार अंसारी को 466/120B में उम्रकैद, 420/120 में 7 साल की सजा 50 हजार जुर्माना, 468/120 में 7 साल की सजा 50 हजार जुर्माना और आर्म्स एक्ट में 6 माह की सजा सुनाई है। वहीं, इसी केस से संबंधित भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में मुख्तार को मंगलवार को दोष मुक्त किा गया था। 11 मार्च को बहस पूरी होने के बाद 12 मार्च को फैसला सुनाया गया है।

मंगलवार को फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे। बता दें कि फर्जी लाइसेंस लाइसेंस में मुख्तार के खिलाफ यह 8वां मामला है जिसमें कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। इससे पहले माफिया पर सात मामलों में सजा हो चुकी है। इन सात मामलों में से तीन मामलों पर सजा वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ही सुनाई थी।

माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ, 10 जून 1987 को दोनाली बंदूक के लाइसेंस के लिए जिला मजिस्ट्रेट के सामने प्रार्थना पत्र दिया गया था। जिसके बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर लेने के बाद अंसारी ने लाइसेंस प्राप्त कर लिया था लेकिन जब ये फर्जीवाड़ा सामने आया तो CB CID ने 1990 में मुख्तार, डिप्टी कलेक्टर सहित पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

यूपी के बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के खिलाफ जब कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, इसी दौरान तत्कालीन आयुध लिपिक गौरीशंकर श्रीवास्तव की मौत हो गई थी लेकिन मुख्तार के खिलाफ मामले की सुनवाई जारी रही। जिसके बाद आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

वाराणसी कोर्ट में इस मामले की लंबे समय से सुनवाई चल रही थी वहीं, अभियोजन पक्ष की तरफ से मुख्तार के खिलाफ गवाही देने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन, पूर्व डीजीपी देवराज नागर समेत दस गवाह पेश किए गए थे। इसके अलावा, ADGC विनय कुमार सिंह और CB CID की ओर से पेश अधिकारी उदय राज शुक्ला ने मामले में पैरवी भी की।

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