नई दिल्ली:- संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने बुधवार सदन में हिमाचल प्रदेश के संशोधन बिल 2022 पर चर्चा में शामिल होकर उक्त बिल के समर्थन में अपने विचार रखें।।
सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने सदन में जनजातीय कार्य मंत्रालय के लिए अनुसूचित जनजाति की सूची में हाटी समुदाय को शामिल करने के लिए हिमाचल प्रदेश प्रस्तावित आदेश (पांचवा संशोधन) बिल, 2022 के समर्थन में अपने विचार रखते हुए कहा कि यह बिल 9 दिसंबर, 2022 को लोकसभा में पेश किया गया था तथा 21.12.2022 को यह बिल लोकसभा द्वारा पास कर दिया यह बिल हिमाचल प्रदेश के हाटी समुदाय के भविष्य का निर्धारण करने वाला विधेयक है।
सिरमोर जिले के गिरिपार क्षेत्र में रहने वाले हाटी समुदाय के लोग पांच दशक से एसटी का दर्जा मांग रहे। इसके लिए समुदाय के लोगो ने कई आंदोलन और प्रदर्शन किए। प्रदेश सरकार ने 2005 में इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। परंतु कांग्रेस की सरकार द्वारा इस पर कोई विशेष ध्यान नही दिया गया।
गिरिपार को एसटी का दर्जा देने का मुद्दा भाजपा सरकार ने गम्भीरता से उठाया था। क्षेत्रीय सांसद वीरेंद्र कश्यप ने मामले को केंद्र तक पहुँचाया और आज इसका परिणाम सब के सामने है।
इसी के विपरीत हाटी समिति ने 21 फरवरी 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की थी। परंतु पूर्व सरकारों के प्रयास नाकाफी रहे।
सितंबर 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वयं हाटी मुद्दे को लेकर गृहमंत्री से चर्चा की थी, 6 दिसम्बर 2018 को क्षेत्रीय सांसद वीरेंद्र कश्यप के नेतृत्व में केंद्रीय हाटी समिति का एक प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री से भी मिला था।आरजीआई को गृहमंत्री ने जल्द कार्यवाही के निर्देश दिए थे। भाजपा सरकारों के द्वारा किये गए प्रयासों का फल आज आपके सामने है।
केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष अमीचन्द और महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री के योगदान को भी नही भुलाया जाना चाहिए क्योंकि इस समिति के अथक प्रयासों से गिरिपार क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और परम्पराए को संजोए रखने में अहम भूमिका इसलिए आज हाटी समुदाय को जनजाति का विशेष दर्जा मिलने जा रहा है।
राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने अपने विचार रखते हुए बताया कि विपक्ष ने पिछले 60 सालों तक आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक माना है। आदिवासी समाज के विकास की चिंता नही की,उनके विकास के रास्ते कैसे खुलेंगे उस पर कभी चर्चा नही की विपक्ष यही मानकर चलता रहा कि जबतक ये आदिवासी समाज गरीबी, गुरबत की जिंदगी जियेगा और हम इसका फायदा उठाते रहेंगे आज आदिवासी समाज अब जाग चुका है।
प्रकृति के साथ जीवन जीने वाले समाज की सुध लेने वाले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैं ह्रदय की गहराइयों से अभिनंदन करता हूँ। अगर कांग्रेस की मंशा सही होती तो, जो कार्य आज भाजपा सरकार द्वारा किये जा रहे है, उनको पहले ही किया जा सकता था,जैसे जल जीवन मिशन योजना, निशुल्क आयुष्मान कार्ड योजना, प्रधानमंत्री सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, राम मंदिर मामला, धारा 370 को हटाना और भी न जाने कितनी योजनाएं और विकास की अमर गाथाएं लिखी जा रही है, जिसका सहभागी बनने पर मेरे जैसे कितने सदस्य होंगे जिन्हें दोनों सदनों में बैठने का अनुभव रहेगा इसका श्रेय केवल प्रधानमंत्री मोदी को देता हूँ।।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने लोकसभा सदन में बताया था कि 1978 से ऐसे कई जनजातीय मामले उलझे हुए थे, पर उसके निराकरण के लिए प्रयास बहुत कम हुए है,क्योंकि कॉंग्रेस की इच्छाशक्ति इनके निराकरण की कभी रही ही नही आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साफ नियत के साथ आदिवासी समाज के कल्याण के लिए कार्य किये जा रहे है, कम से कम आबादी वाले आदिवासी समाज को हक़ दिलाने का काम प्रधानमंत्री मोदी कर रहे है, हमारी सरकार में ऐसे काम लगातार किये जा रहे है,जिससे गरीब दबे-कुचलो को न्याय मिल रहा है,उन्हें संविधान के अधिकार मिल रहे है।
अनुसूचित जनजातियां भारत की जनसंख्या के लगभग st 8.6 प्रतिशत है जिनकी संख्या लगभग 10.4 करोड़ है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत 730 से अधिक अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के विजन अनुरूप भारत सरकार ने जनजातियों के विकास तथा उनकी विरासत और संस्क्रति के संरक्षण पर प्राथमिकता के रूप में ध्यान केंद्रित किया है।
केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रायल द्वारा अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सशक्तिकरण आदि से सम्बंधित विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही है।
आदिवासी समाज को आज तक सम्मान देने का काम किया है तो वह केवल भारतीय जनता पार्टी ही है, जिसके कार्यकाल में लगातार दो राष्ट्रपति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बने है और देश का गौरव बढ़ाया है, मेरे समाज के न जाने कितने जनजातीय बन्धु केंद्र में मंत्री, प्रदेशों में राज्यपाल और राज्य सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं देकर समाज और देश का मन सम्मान बढ़ा रहे है।
हाटी समुदाय को हिमाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने के बाद इन्हें सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
झारखंड, त्रिपुरा एवं उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन अधिसूचित किये गए,तमिलनाडु एवं कर्नाटक की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन के लिए विधेयक संसद द्वारा पारित किए गए। हिमाचल प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन के लिए विधेयक लोकसभा में पारित किए गए तथा राज्यसभा में इस पर चर्चा हो रही है, यह है सबके साथ न्याय।

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