April 19, 2026

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महाराष्ट्र में मां से मिली पाकिस्तान से भारत आई दिव्यांग गीता, लेकिन अब भी करना होगा इंतजार

Geeta : 5 साल पहले पाकिस्तान (Pakistan) से भारत (India) आई दिव्यांग गीता को उसकी मां मिल गई है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के वाजुल में रहने वाली मीना पांद्रे ने गीता को अपनी बेटी बताया है। मीना ने गीता का असली नाम राधा वाघमारे बताया। गीता के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। मां ने दूसरी शादी कर ली है।

मीना पांद्रे अपने परिवार के साथ गुरुवार को गीता से मिलीं। मीना के अनुसार उनकी बेटी के पेट पर जले का निशाना था। गीता के पेट पर भी जले का निशान मिला है। हालांकि, अब तक दोनों का डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया है। टेस्ट और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही गीता को सौंपा जाएगा।

गीता पाकिस्तान में एक रेलवे स्टेशन पर 11-12 साल की उम्र में मिली थी। पाकिस्तान के ईधी वेलफेयर ट्रस्ट ने उन्हें अपने पास रखा था। 26 अक्टूबर 2015 को तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पहल पर गीता को पाकिस्तान से भारत लाया गया था। तब उसे इंदौर की मूक-बधिरों की संस्था में रखा गया था। यहां से उसके परिवार की तलाश शुरू की गई। गीता न बोल सकती हैं और सुन पाती हैं। वह पढ़ी लिखी भी नहीं थीं। ऐसे में उनसे उनकी जानकारी निकलवा पाना मुश्किल था।

इंदौर के आनंद सर्विस सोसाइटी के ज्ञान पुरोहित ने बताया कि गीता अपनी मां से मिलने पहुंची थी। गीता ने बचपन की धुंधली यादों के आधार पर उन्हें इशारों में बताया था कि उसके घर के पास एक नदी थी और वहां गन्ने तथा मूंगफली की खेती होती थी। इसके साथ ही वहां डीजल के इंजन से रेल चला करती थी। ये ब्योरे महाराष्ट्र के मराठवाड़ा औरंगाबाद और इसके आसपास इलाके के कुछ स्थानों से मेल खाते हैं।

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