April 22, 2026

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बुलाया आया है… चंचल कह गये अलविदा

राजेश शर्मा, इंदौर

यारा ओ यारा,
इश्क ने मारा,,, और
बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो,,,,
बेनाम और बॉबी फिल्म के इन सुपरहिट नगमों ने ही रातों – रात नरेंद्र चंचल को सितारा बना दिया था,,,, बिनाका गीतमला के पायदान पर भी इन भावुक सुपर डूपर गानों ने लंबे समय तक अपना परचम लहराया था,,,

निसंदेह,,, आज भी ये नगमे सभी के जेहन में तरो – ताज़ा है,,, इन्हीं नगमों से सुर्खियों में आने वाले मशहूर और जाने माने भजन सम्राट नरेंद्र चंचल का सफर आगाज़ हुआ था जो आज आज 80 साल की उम्र में थमा,,,

16 अक्टूबर 1940 में अमृतसर में जन्मे चंचल माता रानी के प्रति बचपन से ही समर्पित थे,,, और माता पर अटूट आस्था थी,,,, नरेंद्र शायद इकलौते अनोखे गायक होंगे जिन्होंने फिल्मी गानों के साथ -साथ भजन गायकी में भी अपनी छाप छोड़ी हो,,, बॉबी, बेनाम, रोटी कपड़ा और मकान, आशा, अवतार, भक्ति में शक्ति, रामभरोसे, रामकली, उम्र कैद, सरपंच, फौजी और 2000 में अाई अनजाने उनकी आखरी फिल्म थी,,,, हालांकि टीवी शो और पंजाबी चैनल्स में उनके जलवे बरकरार थे,,,


मुख्य रूप से माता भजनों के लिए वे विख्यात थे,,,उनकी गायकी और उनके अंदाज़ से माता के प्रति भक्ति, मनोभाव, समर्पण साफ साफ झलकता था,,, यही उन्हें सबसे अलग और सबसे जुदा गायक बनाता था,,,
कभी हम से दिल,,, और
मै नहीं बोलना,,,
इन मधुर और बेबाकी अंदाज़ वाले नगमे भी हिट रहे,,,और आज भी गुनगुनाए जाते है,,,
उनकी बेमिसाल गायकी के लिए उन्हें प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक के पुरस्कार से नवाजा भी गया,,,

चंचल बेशक इस लोक का सफर खत्म कर अनंत यात्रा पर चले गए है,,, लेकिन उनके अदभुत और बेमिसाल नगमे और भजन हमारे कानों में सदैव मधुर रस और भक्ति घोलते रहेगें,,, माता रानी उन्हें अपने श्री चरणों में जगह प्रदान करें,,, भीगे नयनों से महान गायक को शत शत वंदन एवम नमन

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