April 20, 2026

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महाकाल के आगे चौड़ीकरण हुआ तो 500 हिन्दू परिवार होंगे प्रभावित, मुस्लिम बस्तियां आ जायेगी फ्रंट में, शासन एक बार फिर कर लें विचार!

उमेश चौहान

उज्जैन । प्रदेश की हिन्दूवादी सरकार ने महाकाल मंदिर क्षेत्र से हिंदुओ को हटाने की फुल प्लानिंग कर ली है, उसने महाकाल मंदिर के आगे, पीछे, आसपास 500 मीटर तक चौड़ीकरण की योजना तैयार की है हालांकि अगले हिस्से में शुरुआत में 70 से 100 मीटर तक चौड़ीकरण किये जाने की बात कही जा रही है 70 मीटर तक तो निशान भी लगा दिए गए है जिसमें मंदिर के सामने वाले हिस्से में रहने वाले 300 रहवासी और 200 दुकानदार कुल मिलाकर 500 हिन्दू परिवार दायरे में आ रहे है खास बात यह है कि महाकाल मंदिर के इस 100-200 मीटर के दायरे में ही हिन्दू परिवार निवास करते है।

अगर इन्हें हटा दिया गया तो फिर पीछे स्थित तोपखाना, कोट मोहल्ला, बेगमबाग़ जैसे क्षेत्र आगे आ जाएंगे जिससे यहां हमेशा सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित होती रहेगी, फिलहाल मंदिर के आगे रहने वाले हिन्दू परिवार महाकाल मंदिर आने वाले भक्तों की सुरक्षा और सुविधाओं पर पुरा ध्यान देता है लेकिन इन्हें हटा दिया तो फिर महाकाल भक्तों की भी फजीहत होना तय है हालांकि प्रशासन ने अब तक सभी को गुमराह कर रखा है कि मंदिर के आगे आखिर वे कितना चौड़ीकरण करेंगे इधर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी फिलहाल मंदिर से जुड़े विवादास्पद निर्णयों पर रोक लगा दी है।

लेकिन नगर निगम चुनाव के बाद ये जिन्न बोतल से फिर बाहर आना तय है क्योंकि महाकाल मंदिर के शिखर दर्शन या यूं कहे कि माधव सेवा न्यास तक सीधी एप्रोच के लिए ये चौड़ीकरण आवश्यक है लेकिन शासन प्रशासन को चौड़ीकरण से होने वाले लाभ हानि पर एक बार पुनः विचार जरूर करना चाहिए क्योंकि शुक्रवार को हुई घटना के बाद इस बात पर गहन चिंतन की आवश्यकता मेहसूस की जा रही है ।

ये होंगे नुकसान ..

महाकाल मंदिर के 100-200 मीटर के दायरे में मंदिर से जुड़े पंडे पुजारी, सेवादार, सिक्युरिटी गार्ड और अन्य पुराने महाकाल भक्तों के निवास है, साथ ही क्षेत्र में कई हिन्दू परिवारों ने अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटी छोटी होटलें, विश्राम गृह, दुकानें आदि खोल रखी है जिनसे उनका तो गुजर बसर होता ही है साथ ही महाकाल आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा के साथ बेहतर सुविधा भी मिल जाती है, ये हिन्दू परिवार सभी श्रद्धालुओं को देर रात तक भी सुरक्षा प्रदान करते है।

कहीं किसी के साथ कोई अप्रिय व्यवहार और स्थिति निर्मित न हो इसका भी ख्याल रखते है, मंदिर और शहर से जुड़ी तमाम जानकारियां भी उपलब्ध कराते है जिससे श्रद्धालुओं को सुकून के साथ अपनापन भी मिलता है, भक्तिमय वातावरण भी मिलता है, अगर इन्हें हटा दिया गया तो फिर यात्रियों को कोटमोहल्ला, बेगमबाग़, और तोपखाना रोड के मुसाफिरखानो और मुस्लिम होटलों में रुकना और खाना पीना पड़ेगा जहां यात्री को सुविधा तो मिल जाएगी लेकिन सुरक्षा, शुद्धता, अपनापन और भक्तिमय माहौल की कोई ग्यारंटी नही होगी।

हादसों से भी इंकार नहीं …

महाकाल थाना क्षेत्र शहर के सबसे संवेदनशील थानों में से एक है, यहां सिमी गतिविधियों के साथ ही आये दिन सांप्रदायिकता का माहौल निर्मित हो जाता है, सारे चल समारोह, जुलूस, सवारी यहीं से निकलती है, जिसके कारण कभी भी माहौल गरमा जाता है । क्षेत्र में खाती समाज की रथ यात्रा पर पथराव, गोपाल मंदिर में घुसपैठ, बेगमबाग विवाद, तोपखाना में पथ संचलन पर पथराव, माता विसर्जन जुलूस पर पथराव, कावड़ यात्रियों पर पथराव जैसी घटनाएं हो चुकी है ताजा मामले में श्रीराम रैली पर पथराव हुआ है जिसमें एक दर्जन युवा घायल हुए है और सांप्रदायिक तनाव भी निर्मिय हुआ है, जिस मार्ग पर यह पथराव हुआ है वह महाकाल मंदिर का मुख्य मार्ग है जिसने इस घटना का वीडीओ बनाया है वह भी एक हिन्दू परिवार है।

अगर इन गिने चुने परिवारों को भी यहां से हटा दिया गया तो फिर किसी भी अप्रिय स्थिति के होने की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता हालांकि महाकाल मंदिर से मुस्लिम समाज के लोगो को भी आय मिलती है इनकी भी बड़ी संख्या में यहां होटलें है और ये भी विवाद नही चाहते लेकिन कुछ खुराफाती तत्व अक्सर शहर की फिजा बिगाड़ने में लगे रहते है जिसका खामियाजा दोनो धर्मो के लोगो को भुगतना पड़ता है, फिलहाल महाकाल मंदिर के आसपास हिन्दू परिवारों की बसाहट है तो यह विवाद यहीं के यहीं शांत हो जाता है अगर इन्हें हटा दिया गया तो फिर यह विवाद उग्र रूप भी धारण कर सकता है जिस पर भी शासन प्रशासन को ध्यान देना चाहिए साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर मंदिर के सामने कितने मीटर तक चौड़ीकरण की योजना है ।

पीछे करोड़ो खर्च तो फिर आगे क्यों कर रहे डिस्टर्ब …

महाकाल मंदिर क्षेत्र को नया स्वरूप प्रदान करने के लिए स्मार्ट सिटी और महाकाल वन प्रोजेक्ट के तहत पीछे रुद्रसागर और जयसिंहपुरा क्षेत्र में करोड़ो रुपयों की योजना बनाई गई है जिसका कार्य भी तेज गति से चल रहा है, यहां मल्टीलेवल पार्किंग, कॉरिडोर, नोका विहार, शॉपिंग मॉल, यात्री गृह, प्रतीक्षालय, जैसी तमाम सुख सुविधा और सौंदर्यीकरण का काम करवाया जा रहा है, भविष्य में श्रद्धालु इसी मार्ग से मन्दिर में प्रवेश करें ऐसी भी योजना है जिसके लिए हरिफाटक की पांचवी भुजा भी तैयार की जा रही है जो सीधे इन्टरपीटीशन सेंटर पर उतरेगी और यहीं पार्किंग करके रुद्र सागर से होते हुए श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करेगा और यहीं से पुनः लौटेगा।

जब सब कुछ मंदिर के पिछले हिस्से से ही किया जाना है तो फिर बेवजह अगले हिस्से को डिस्टर्ब करके प्रशासन नई मुसीबतें क्यों मौल लेना चाह रहा है, महाकाल मंदिर समिति का जितना उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन कराना है उतना ही उद्देश्य यहां से शहर के लोगो को रोजगार उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए क्योंकि शहर में धार्मिक पर्यटन के अलावा दूसरा कोई बड़ा रोजगार नही है।

अगर सरकार इस देव नगरी को अच्छे से विकसित करें तो यह पुरे प्रदेश को रोजगार दे सकती है लेकिन अमुमन देखा जा रहा है कि शासन प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ सौंदर्यीकरण और सुख सुविधाओं पर है यहां से लोगो को रोजगार मिल सके ऐसी कोई ठोस योजना किसी के जहन में नही है । ऐसे में जो लोग रोजगार पा रहे है उन्हें तो कम से कम यहां से पृथक नही किया जाना चाहिए , खैर सबके अपने हित और अपनी योजनाये है क्या कहा जाए ।

जय महाकाल

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