सरकार बंद कर दे योजना, या गरीब स्वेच्छा से छोड़ दे जिल्लत की रोटी !
उज्जैन में BPL सूची की जांच के नाम पर मचाया जा रहा है कोहराम, 90 प्रतिशत लोगो को किया जा रहा लिस्ट से बाहर
उमेश चौहान
उज्जैन। गांधी जी ने नारा दिया था ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो” और वर्तमान दौर के नेता और अधिकारी अघोषित रूप से एक नारा दे रहे है “गरीबों राशन छोड़ो” । दरअसल उज्जैन सहित प्रदेशभर में इन दिनों BPL सूची की जांच कराई जा रही है जिनमें प्रशासन बता रहा है की उन्हें आश्चर्यजनक परिणाम मिल रहे है, वार्ड 49 को लेकर इन दिनों एक हव्वा मचा हुआ है कि यहां रहने वाले 310 BPLलोगो में मात्र 30 ही वास्तविक गरीब मिले है लेकिन हमारा दावा है कि प्रशासन अगर प्रदेश सरकार द्वारा बनाये गए सरकारी मापदंड के अनुसार जांच करे तो शहर तो क्या देश- प्रदेश में कोई BPL के दायरे में नही आएगा, गरीब तो छोड़े भिखारी भी इस लिस्ट में नही आएंगे क्योंकि सरकारी मापदंड के अनुसार BPL की पात्रता इतनी कम है कि कोई भी गरीब इस लिस्ट में आ ही नही सकता, तो क्या ऐसे गरीबों का राशन बंद कर देना चाहिए !
क्या सिर्फ पक्का मकान और कुछ सुख सुविधाओं की वस्तुएं देखकर ये मान लिया जाए कि शहर और प्रदेश में कोई गरीब नही बचा, हालही में हमने कोरोना में देखा है कि अच्छे अच्छे परिवारों को भी खाने के लाले पड़े है, भले ही उनके घरों में भौतिक सुख सुविधाएं थी लेकिन उनके अनाज के डिब्बे खाली थे क्योंकि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने लोगो की कमर तौड़कर रख दी है, सरकार BPL के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कुछ किलो गेंहू और चांवल देता है और वह भी ऐसा की देखकर खाने की इच्छा भी न हो और यदि फिर भी उसे कोई लाकर खा रहा है तो हमारी नजर में वो वास्तविक गरीब है, हो सकता है कि उसने कुछ रुपये एकत्रित करके या सरकार से अनुदान लेकर अपना कच्चा घर पक्का कर लिया हो, कच्ची टॉयलेट पक्की बना ली हो, घर मे किश्तों पर टीवी, पंखा, कूलर, फ्रिज और दो पहिया वाहन खरीद लिया हो लेकिन उसे मदद की दरकार अब भी है, जब तक सरकार प्रत्येक व्यक्ति को कलेक्टर गाइडलाइंस के अनुसार वेतन और रोजगार उपलब्ध न करा दे उसका राशन पानी बंद नही किया जाना चाहिए, सरकार ने खुद ही लोगो को पक्के मकान और टॉयलेट बनवा दिए और अब उन्ही मकानो को आधार बनाकर यदि उन्हें BPL सूची से बाहर करती है तो ये गरीब क्या उस पक्के मकान की ईंटो को खाकर अपना पेट भरेंगे ।
हो सकता है कि BPL सर्वे में कुछ सरकारी नोकरी वालो और व्यापार करने वालो के नाम सामने आ रहे हो लेकिन इनकी संख्या उतनी नही है जितनी बताई जा रही है, 20-30 प्रतिशत लोग ही ऐसे होंगे जिन्हें सरकार की मदद की दरकार नही है और ये लोग तो युंही सरकारी अनाज नही ला रहे है इनके हिस्से का अनाज तो कंट्रोल वाले ब्लैक कर रहे है, इनमें से अधिकांश गरीब बस्तियों में रहने के कारण गरीब कहला रहे है, हालांकि पक्का घर बनाने से कोई गरीबी रेखा से ऊपर नही उठ जाता लेकिन फिर भी सरकारी दायरा है तो इन 20-30 प्रतिशत लोगो को बाहर कर दें , 90-95 प्रतिशत लोगो को अगर इस सूची से बाहर करेंगे तो इसका अर्थ है कि अब देश प्रदेश में कोई गरीब बचा ही नही, क्या सब अमीर हो गए है इस पर भी कलेक्टर आशीष सिंह को ध्यान देना चाहिए और BPL को हव्वा बनाकर गरीब परिवारों का मजाक नही बनाना चाहिए जितने सस्ते में आप इन्हें भोजन दे रहे हो उससे कई सस्ता भोजन तो विधानसभा और लोकसभा में विधायक और सांसदों को मिलता है और वे सब कितने गरीब है ये सब जानते है ।

बांटने से ज्यादा राशन फेंक रहे अधिकारी ..
BPL परिवारों को सरकार की और से 1 रुपये किलो गेहूं और 2 रुपये किलो चांवल उपलब्ध कराया जाता है, जिस घर मे जितने सदस्य है उस मान से प्रति व्यक्ति 5 किलो गेंहू और 2 किलो चांवल दिया जाता है उसमें भी कई लोग ये राशन नही लाते है जिसे कंट्रोल संचालक ब्लैक कर देता है जिसमें खाद्द विभाग का भी हिस्सा रहता है, वर्तमान में उज्जैन जिले में करीब जो राशन बांटा जा रहा है उससे करीब 15 हजार BPL परिवार अपना पेट भर रहे है शेष तो राशन लेने जाते ही नही । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिले का भ्रष्ट तंत्र जितना राशन गरीबो को वितरित नही करता उससे ज्यादा की कालाबाजारी करता है, आज भी लाखों क्विंटल राशन आपको जिलेभर में जहां तहां पड़ा हुआ सड़ता हुआ नजर आ जायेगा, अकेले उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में ही लाखों गेहूं की बोरियां पड़ी पड़ी सड़ने का इंतेजार कर रही है, ये नजारा अकेले उज्जैन शहर का नही है जिले की सभी सोसायटियों में इसी तरह गेंहू को सड़ाया जा रहा है ताकि उसे ओने पौने दामों में नीलाम करके ठेकेदारों से करोड़ो रुपया कमाया जा सके, सरकार ने ये गेहूं किसानो से 1950 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा है।
जिसके रख रखाव पर ही करीब 26 रुपये प्रति क्विंटल खर्च किया है, रबी के सीजन में खरीदा गया यह गेहूं अधिकारियों की उदासीनता के चलते युंही खराब हो रहा है जिसे बाद में बीयर बनाने वाली फेक्ट्रियो या किसी साहूकार को कौड़ियों के दाम बेच दिया जाएगा, सरकार और कलेक्टर को करोड़ो रूपये का ये घायला नजर नही आ रहा है, अरबो रुपयों का ये नुकसान नही दिख रहा क्योंकि इस नुकसान में कई मठाधीशों का फायदा है, उन्हें तो सिर्फ गरीबों के पेट मे जा रहा वो 1 रुपये किलो का गेहूं चांवल नजर आ रहा है जो उस गरीब का हक और अधिकार है । इसीलिए हमने कहा कि सरकार की नीति ” “गरीबों राशन छोड़ो” वाली है ।
जलील होने से बेहतर खुद ही कटा लें नाम …
200-500 रुपये का राशन लेकर सरकारी गरीब कहलाकर जलील होने से बेहतर है कि शहर के BPL कार्ड धारकों को खुद ही अपना नाम इस लिस्ट से कटा लेना चाहिए वैसे भी BPL कार्ड से आपको सिर्फ थोड़ा सा अनाज मिलता है वो भी दोयम दर्जे का जिसे खाकर न आप बलवान होंगे और न आपके बच्चों को पोषण मिलेगा, अगर आपने अपनी मेहनत से घर बनाया है और बाकी जरूरतें भी पुरी कर रहे है तो फिर सरकार से ये 200-500 का एहसान भी लेना बंद कर देना चाहिए क्योंकि ये एहसान नही बल्कि आपकी गरीबी का मज़ाक है, BPL सूची में जो गड़बड़ियां बताई जा रही है उसका रेशों 90% तक बताया जा रहा है, BPL के जो मापदंड है उसके अनुसार तो शहर में कोई पात्र हो ही नही सकता, भिखारी भी दिनभर में इतनी भीख मांग लेता है कि जिसको जोड़ा जाए तो वह गरीबी रेखा से ऊपर निकल जायेगा, और जिस तरह से जिला प्रशासन सर्वे कर रहा है।
उस तरह से युंभी 90- 95% लोग BPL सूची से बाहर होने ही वाले है और फिर प्रशासन आपकी गाढ़ी मेहनत से बनवाये गए घरों के फोटो खींचकर अखबारों में छपवाकर आपको जलील भी करने वाला है, आपको वसूली का नोटिस भी जारी करेगा और आपको मुकेश अम्बानी, गौतम अडानी बताने का भी भरपूर प्रयास किया जा सकता है क्योंकि सरकार की माली हालत बहुत खराब है लिहाजा वह अब आपको कोई सुविधा नही दे सकती, इसलिए आप स्वेच्छा से ही लूटी पीटी सरकार की सब्सिडियां त्याग दे तो बेहतर है नही तो आपको बेज्जत करके आपसे ये हक छीन लिए जाएंगे ।
ये है BPL का दायरा ..
1 – सरकार द्वारा BPL परिवारों के लिए जो दायरा तय किया गया है उनमें प्रति व्यक्ति की आय 500 रुपये महीने से अधिक नही होना चाहिए, मेरे ख्याल से एक भिखारी भी इससे ज्यादा कमा लेता है ।
2 – सरकारी गरीब बनने के लिए आपका मकान कच्चा तिरपाल वाला होना चाहिए उस पर पक्की छत नही होना चाहिए जो सरकार ने खुद ही डलाकर दे दी है, पीएम आवास के तहत सभी गरीबो को छत डालने के पैसे दिए जा रहे है । वहीं लोन में भी सब्सिडी मिल रही है लिहाजा लोग अपने कच्चे घरों को पक्का कर रहे है ।
3 – आपके घरों में पक्के शौचालय नही होना चाहिए, आप कच्ची लैट्रिन का उपयोग करते हो तभी आप BPL के लिए पात्र होंगे, सरकार ने खुद ही सभी के शौचालय पक्के करा दिए है और कच्चे शौचालयो पर पेनेल्टरी ली जा रही है लिहाजा इस दायरे में भी कोई नही आता ।
4 – आपके घरों में भौतिक सुख सुविधा की वस्तु जैसे टीवी, फ्रिज, पंखा, कूलर, बाईक आदि नही होना चाहिए , आजकल ये वस्तुएं बहुत सामान्य है गरीब से गरीब व्यक्ति के घरों में मिल जाएगी, पहले ये वस्तुएं दुर्लभ थी लेकिन अब इन पर आसानी से लोन मिल जाते है और हर कोई नई पुरानी वस्तुएं खरीद लाता है इनसे कोई अमीर नही बन जाता ।
5 – आपके घर में गैस सिलेंडर नही होना चाहिए, चूल्हे पर खाना बनाने वाला ही BPL के लिए पात्र माना गया है, सरकार ने उज्वला योजना में सबके घरों में चूल्हे भी पहुंचा दिए है, पक्के मकानों, शौचालयों औऱ गैस सिलेंडर देकर सरकार ने खुद ही आपको BPL सूची से बाहर कर दिया है फिर सर्वे कराने से क्या मतलब BPL की इस योजना को सरकार को खुद ही बंद कर देना चाहिए ।
नोट – जानकारी एसडीएम कार्यालय के सूत्रों से प्राप्त है, हो सकता है मौजदा वक्त में इसमें कुछ फेरबदल किये गए हो ।
यह बोले अधिकारी
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श्री मारू – खाद्द अधिकारी, उज्जैन

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