गणेश महोत्सव 22 अगस्त से शुरू हो रहा है। सनातन धर्म में गणपति का स्थान बेहद खास है। उन्हें विघ्नहर्ता के नाम से भी पुकारते हैं।
गणेश पूजा में दूर्वा का काफी महत्व है। कहा जाता है कि इसके बिना गणेश पूजा पूरी नहीं होती है। 21 लड्डूओं का भोग लगाएं, गणेश जी के पास 5 लड्डू रखकर बाकी बांट देने चाहिए। बप्पा की आरती सुबह औऱ शाम दोनों पहर होनी चाहिए।
हालांकि इस दौरान कहा जाता है कि चांद के दर्शन भी नहीं करने चाहिए। गणेश चतुर्थी के दिन रात्रि में चंद्रमा के दर्शन न करें। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता है। 22 तारीख को रात्रि में चंद्रमा के दर्शन करने से मिथ्या कलंक लग सकता है। कहां जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण को मणी की चोरी का आरोपी लगा था।
गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
– मध्यान्ह गणेश पूजन मुहूर्त – 10:46 सुबह से 1:57 दोपहर
–वर्जित चंद्रदर्शन का समय – 8:47 रात से 9:22 रात तक
– चतुर्थी तिथि आरंभ – 21 अगस्त की रात 11:02 बजे से।
चतुर्थी तिथि समाप्त : 22 अगस्त की रात 7:56 बजे तक। पं.योगेश द्विवेदी श्री साधना ज्योतिष केन्द्र उज्जैन (म.प्र.) मोबाइल- 98277-14275

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