तुम ऐसे तो ना थे
तुम किरदार में थे
इसे हकीकत क्यों समझ बैठे
तुम यूं हार मान जाओगे
तुम ऐसे तो ना थे ।।
तुम हो तुम थे
इसमें आज बहुत फर्क है
तुम अपने में ही फस जाओगे
तुम ऐसे तो ना थे ।।
उलझनों को पार कर
तुम चमकते सितारे बने थे
बादलों से यूं डर जाओगे
तुम ऐसे तो ना थे ।।
तुम सुशांत थे
अशांत कैसे हो गए
अपने को ही भुला गए
तुम ऐसे तो ना थे।।
सब कुछ पाने की चाहत में
कुछ खोना भी पड़ता है
यह सब जानकर भी
तुम अनजान बन गए
तुम ऐसे तो ना थे ।।
जीतने की कोशिश में
तुम हार को गले लगा लोगे
हो जाओगे इतने खुदगर्ज
तुम ऐसे तो ना थे।।
✒️ प्रो.वंदना जोशी

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