शरद पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्णिमा अन्य पूर्णिमा की तुलना में काफी लोकप्रिय है। मान्यता है कि यही वो दिन है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। हिन्दू धर्म में मनुष्य के एक-एक गुण को किसी न किसी कला से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि 16 कलाओं वाला पुरुष ही सर्वोत्तम पुरुष है। कहा जाता है कि श्री हरि विष्णु के अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने 16 कलाओं के साथ जन्म लिया था, जबकि भगवान राम के पास 12 कलाएं थीं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा का विधान है। साथ ही शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर उसे आकाश के नीचे रखा जाता है। फिर 12 बजे के बाद उसका प्रसाद गहण किया जाता है। मान्यता है कि इस खीर में अमृत होता है और यह कई रोगों को दूर करने की शक्ति रखती है। शरद पूर्णिमा के दिन ही वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है।
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह हर साल अक्टूबर के महीने में आती है। इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर 2019 को है। 13 अक्टूबर 2019 को चंद्रोदय का समय शाम 05 बजकर 26 मिनट का ी।
शरद पूर्णिमा का बहुत है महत्व, मनोकामनाएं होती है पूर्ण

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