राफेल डील को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से देश के आस्तित्व पर खतरा है। सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे के गोपनीय दस्तावजों रे परीक्षण के फैसले से रक्षा, बलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है। हलफनामे में सरकार ने कहा कि राफेल पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती-फिरती जांच की कोशिश की गई। मीडिया में छपे 3 आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार का अंतिम फैसला। ये 3 लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रुख को व्यक्त नहीं करते हैं।
केंद्र ने कहा कि ये सिर्फ अधिकारियों के विचार हैं जिनके आधार पर सरकार कोई फैसला कर सके। सीलबंद नोट में सरकार ने कोई गलत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी। सीएजी ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जांच की है और कहा है कि यह 2.86 प्रतिशत कम है। केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट जो भी मांगेगा सरकार राफाल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं हैं, इसलिए सारी याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए। गौरतलब है कि दिसंबर के अपने फैसले में अदालत ने कहा था कि वर्तमान जैसे मामलों में मूल्य निर्धारण विवरण की तुलना करना इस अदालत का काम नहीं है। अब कोर्ट इस मामले में 6 मई को सुनवाई करेगा।
राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का जवाबी हलफनामा

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