2जी केस में सीबीआई की विशेष कोर्ट द्वारा ए राजा समेत सभी आरोपियों को बरी करने के बाद इस मामले पर राजनीतिक घमासान शुरू हो चुका है। राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जिस कथित घोटाले की वजह से हम सत्ता से बाहर हुए, वास्तव में वैसा कुछ घोटाला हुआ ही नहीं है। उन्होंने बीजेपी से इस मसले पर जवाब देने को कहा।
इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पलटवार करते हुए कहा कि कोर्ट के फैसले को कांग्रेस सटिफिकेट नहीं समझें। कांग्रेस के नेता तो इस फैसले को सम्मान पत्र समझ रहे हैं और यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि स्पेक्ट्रम आवंटन में जिन नीतियों को अपनाया गया, वो जैसे कि ईमानदार नीतियां थीं? जबकि वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में सभी स्पेक्ट्रम आवंटन को रद कर दिया था। आवंटन की तत्कालीन पॉलिसी को भी रद्द कर दिया गया था और पाया गया कि सरकार को उससे नुकसान हुआ है। उसके बाद कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में नई नीति बनाने को कहा। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी तो जेटली ने कहा कि निश्चित रूप से जांच एजेंसियां इस मामले को देखेंगी और उसके बाद निर्णय करेंगी।
वहीं दूसरी ओर इस मामले के बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि फैसले के खिलाफ सरकार को हाई कोर्ट में अपील करनी चाहिए। स्वामी की जनहित याचिका पर 2जी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
2जी स्पेक्ट्रम : फैसले को सम्मान पत्र न समझे कांग्रेस : अरुण जेटली

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