हिन्दू धर्म में गणेश चुतर्थी का बडा़ महत्व है। भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। जो कि इस बार 25 अगस्त को मनाई जा रही है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार वैसे तो हर माह की चतुर्थी में गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चना होती है लेकिन भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। इस चतुर्थी को सर्वप्रथम पूज्यनीय भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। जिससे पूरे देश में इस दिन को गणेशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। देश के कई भागों में गणेश चतुर्थी एक बड़े उत्सव के रूप में 10 दिन तक मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस खास दिन पर गणेश जी की पूजा विधिवत करने से भगवान गणेश भक्तों की परेशानियों को दूर करते हैं। गणेश जी हर मनोकामना पूरी करते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके सबसे पहले घर पर एक चौकी रखें। उस पर एक लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी को स्थापित करें। जल, सिंदूर, रोली, अक्षत, दूब और फूलों की माला से गणेश जी की पूजा अर्चना करें। इसके बाद गणेश जी को प्रिय उनके मोदक का भोग लगाएं। फिर आरती कर अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त
चतुर्थी 24 अगस्त 2017 को रात 20ः27 बजे शुरू हो गई है और 25 अगस्त 2017 को रात 20ः31 बजे समाप्त होगी। घर में या प्रतिष्ठान में गणेश जी की मूर्ति लाने का सबसे उत्तम समय सुबह 07ः38 से 08ः32 तक रहेगा। वहीं गणेश पूजन का शुभ समय प्रातः 09ः15 से 10ः28 बजे तक और दोपहर 12ः16 से 01ः17 तक है। चुकि लगभग 9 बजे भद्रा लग जाएगी, जिससे सबसे सही समय प्रातः काल का है। वैसे तो भद्रा का प्रभाव गणेश जी पर नहीं होता फिर भी यदि आप मुर्हूत और भद्रा दोनों के हिसाब से चलना चाहते है तो शाम के बाद बैठा सकते है।

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