भगवान गणेश, विनायक, विघ्नहर्ता, बप्पा के नाम व स्वरूप अनेक है। प्रथम पूज्य गंजानन अलग-अलग स्थानों पर विराजित है। इनके कई मंदिरों का विशेष महत्व है। हम न्यूज प्रवाह पर उनके प्रमुख स्थानों की विशेषता आपकों बताने जा रहे है। जहां आप जाकर दर्शन लाभ ले सकते है और अपनी हर अधुरी मनोकमनाओं को पूर्ण कर सकते है।
आज सबसे पहले चलते है महाराष्ट्र में स्थित अष्टविनायक। अष्टविनायक की यात्रा में गणेश जी के 8 पवित्र मंदिरों को शामिल किया गया है। सभी अष्टविनायक मंदिर स्वयंभू है याने कि स्वयं उत्पन्न हुए है। भगवान गणेश के विभिन्न नामों मोरेश्वर, महागणपति, चिंतामणि, गिरीजटमज, विघ्नेश्वर, सिद्धिविनायक, बल्लालेश्वर, और वराद विनायक हैं।
अष्टविनायक में गणेशजी के 8 रूपों के दर्शन होते है। जो विभिन्न जगहों पर विराजित है। कहा जाता है कि इनके दर्शन मात्र से जीवन सफल हो जाता है। यह सभी मंदिर महाराष्ट्र के पूणे के आस-पास स्थित है।
1. चितांमणि गणेश महाराष्ट्र के तेउर में विराजे है, जो पूणे से 25 किमी है।
2. मोरेश्वर गणपति पूणे जिले के मोरगांव में स्थित है, यह तेउर से 70 किमी है।
3. सिद्धिविनायक, सिद्धटेक पर स्थित है, जो मोरगांव से 65 किमी है।
4. महागणपति, रांजनगांव में विराजे है, यह सिद्धटेक से 92 किमी पढ़ता है।
5. विघ्नेश्वर, ओजर में स्थित है, रांजनगांव से यह 100 किमी दूर है।
6. गिरीजटमज मंदिर लेंयद्री में है, ओजर से होते हुए यह मात्र 15 किमी है।
7. वराद विनायक मंदिर लेंयद्री से 134 किमी है जो महद में विराजे है।
8. बल्लालेश्वर, पाली में स्थित है, जो 42 किमी है महद से।
भगवान के मनोरम रूपों के दर्शन यात्रा करने सामान्यतौर पर आपको 2 दिन का समय की आवश्यकता होगी।
गणेश उत्सव में करे, महाराष्ट्र अष्टविनायक यात्रा

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