प्रदेश में 4 साल से पदोन्नतियां बिल्कुल बंद हैं। मंहगाई भत्ते की किश्त रोक ली गई थी। सातवे वेतनमान की किश्त रोक ली गई थी। जीपीएफ की ब्याजदर घंटा दी गई। एनपीएस में शासकीय अंशदान घंटा दिया गया। इस सबके बाद अब जुलाई माह में लगने वाली वेतन-वृद्धि को काल्पनिक आधार पर देने का निर्णय किया जाना किसी वज्रपात से कम नहीं था।
इस कारण से मंत्रालयीन कर्मचारी संघ, मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, राजपत्रित अधिकारी संघ, लघुवेतन कर्मचारी संघ, कर्मचारी कांग्रेस, शिक्षक कांग्रेस, लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ, निगम मंडल कर्मचारी संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, पशुचिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संघ, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता संघ, विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ, आई टी आई कर्मचारी संघ, संविदा कर्मचारी महासंघ, नेशनल मूवमेंट बार ओल्ड पेंशन स्कीम, यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्पलायीज ऐंड इंजीनियर्स इत्यादि अग्रणी अधिकारी कर्मचारी संगठनों ने 31 जुलाई को सामूहिक रणनीति बनाने हेतु एक मीटिंग लघुवेतन कर्मचारी संघ के कार्यालय कर्मचारी भवन में बुलाई थी।
उसी परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश शासन के गृहमंत्री माननीय नरोत्तम मिश्रा ने सभी अधिकारी कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक, मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री राजेंद्र शर्मा, कर्मचारी कांग्रेस के प्रांताध्यक्ष एवं कर्मचारी आयोग के सदस्य वीरेन्द्र खोंगल, लघुवेतन कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष महेन्द्र शर्मा, राजपत्रित अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष डी के यादव के साथ गृह मंत्री ने चर्चा की।
चर्चा के बाद वेतन-वृद्धि के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री ट्वीट के माध्यम से सारी स्थिति स्पष्ट करेंगे जिससे सारी भ्रांतियों का निवारण हो जाएगा। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि वेतन-वृद्धि के संबंध में मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद ही अगला कदम तय किया जायेगा। आज 31 जुलाई को घोषित सभी अधिकारी कर्मचारी संगठनों की सामूहिक बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्व घोषणा अनुसार होगी।

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