भगवान शिव की शक्ति अलोकिक है। उनके अपने रूप है जिनका वर्णन हमें विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। वर्तमान समय में शिव को साक्षत किसी ने नहीं देखा होगा, लेकिन दिव्य होने की अनुभुति भगवान महाकालेश्वर मंदिर में देखने को मिलती है। यहां शिव के अदभुत और अनेकों रूप हमेशा देखने को मिलते है। जो संभव होता है महाकाल मंदिर में होने वाले विभिन्न श्रृंगारों के अदभुत दर्शन मात्र से।
विश्व प्रसिद्ध उज्जैन के महाकाल मंदिर में भक्तों का जमावड़ा हमेशा लगा रहता है। प्रातः काल में होने वाली भस्मार्ती से लेकर रात को होने वाली शयन आरती तक मंदिर में शिव भक्तों को भगवान महाकाल के अनुपम रूप देखने को मिलते है।
महाकालेश्वर मंदिर में सब कुछ भव्य होता है। वैसे ही फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। भगवान महाकाल गुरूवार से श्रद्धालुओं नौ दिन तक विभिन्न रूपों में दर्शन देगें। शिवनवरात्रि के पहले दिन कोटितीर्थ कुण्ड के पास स्थित श्री कोटेश्वर महादेव का शिव पंचमी का पूजन किया जाएगा।

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