April 18, 2026

News Prawah

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लंबा पैदल सफर, गर्भवती महिला और बच्चे, कितने मजबूर है यह मजदूर

भारत में कोरोनावायरस बड़ी तेजी से फैल रहा है। शुरुआत में इसकी गति काफी धीमी थी। लेकिन अब मामले धीरे धीरे कर सामने आ रहे हैं। लेकिन इसके साथ एक समस्या और भी है पेट पालने की। जो मजदूर दिन रात मेहनत कर अपनी रोजी रोटी का इंतजाम करता था वह दर-दर भटकने को मजबूर है।

हाल ही में कोरोना वायरस के चलते अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए मजदूरों को निकाल कर घर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उसको सुविधा नहीं मिल पाने के कारण वह कई किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर है। इसमें गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

महोबा जिले में कैमाहा गांव के पास उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश का बॉर्डर है। यहां गुजरात, महाराष्ट्र से सैकड़ों वाहनों में हजारों मजदूर पहुंचे हैं, लेकिन प्रशासन इन्हें जिले में एंट्री नहीं दे रहा है जिससे इन मजदूरों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।

कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन लागू है। लॉकडाउन से सबसे ज्यादा परेशनी गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को उठानी पड़ रही है। अब उत्तर प्रदेश के महोबा में यूपी-मध्य प्रदेश बॉर्डर पर लगभग 5000 मजदूर फंस गए हैं। ये अपने घर जाने के लिए दूसरे राज्यों से कैसे भी चले तो आए लेकिन अब यहां इन मजदूरों को यूपी में घुसने की इजाजत नहीं दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के मध्य प्रदेश बॉर्डर पर दिल दहला देने वाला नजारा देखने को मिला है। यहां गुजरात, महाराष्ट्र से आए हजारों मजदूर फंसे हुए हैं। लॉकडाउन के कारण बेबस, बदहाल मजदूर भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो भूख-प्यास से बेहाल हैं।

ये सभी मजदूर उत्तर प्रदेश बॉर्डर में प्रवेश कर अपने घर को जाने के लिए आए हैं, हालांकि इन्हें बॉर्डर पार करने की इजाजत नहीं है। बॉर्डर पर जिले की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा लगा है और इनको बॉर्डर क्रॉस नहीं करने दिया जा रहा है।

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