आयुर्वेद इलाज के स्थान पर करते हैं एलोपैथिक इलाज, गंभीर बीमारियों में मरीज के लिए बढ़ जाती है मुश्किले ।
अब्दुल रईस, भानपुरा। मध्य प्रदेश सरकार कितने ही बेहतरीन इलाज का दावा कर ले एवं अनेक तरह की स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ की योजना बना ले परंतु आज भी गांव तो गांव तहसील मुख्यालय व बड़े शहरों में भी झोलाछाप डॉक्टरों का की भरमार लगी हुई है। आयुर्वेदिक या अन्य विधा में इलाज करने की पात्रता रखने वाले झोलाछाप डॉक्टर गांव में किसी मेडिसिन स्पेशलिस्ट व सर्जन से कम नहीं है। 2 या 3 हजार से लेकर 4 अथव 5 हजार की जनसंख्या वाले गांव में 8 से 10 झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा सरेआम ग्रामीणों का इलाज किया जाना आम बात है।
अनपढ़ एवं कम पढ़े लिखे ग्रामीण ही नहीं समझदार लोग भी ऐसे झोलाछाप एवं नीम हकीम खतरे जान वाले डॉक्टरों से उपचार करवाते हुए देखे जा सकते हैं। कई बार छोटी-छोटी बीमारियों से लेकर बड़ी है वह गंभीर बीमारियों के इलाज का भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टर दावे के साथ इलाज करने का दम भरते हैं परंतु जब मरीज की हालत खराब होती है तो फिर परिवार वाले बड़े शहरों व अधिकृत डॉक्टरों की ओर भगने लगते हैं।
यहां तक कि मरीजों की हालत गंभीर होने पर उनकी जान बचाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों को राजनीतिक प्रश्रय ही प्राप्त नहीं होता है गांव के बड़े लोगों तथा स्वास्थ्य विभाग के आमले का भी संरक्षण प्राप्त होता है इसी के चलते गांव गांव में इन फर्जी डॉक्टरों का बोलबाला है।
पत्रकारों ने झोलाछाप डॉक्टर के चिकित्सालय को देखा तो पाया कि वहां हर तरह की बीमारी का इलाज किया जा रहा था एवं न कोई डिग्री न कोई शासन द्वारा मान्यता ही मिली हुई है, ओर न ही अंग्रेजी दवाइयों से इलाज करने की विशेषज्ञता ही प्राप्त है, ऐसे डॉक्टर 25, 30 से लेकर 40 सालों से गांव में इलाज कर रहे हैं। खास करके बंगाली डॉक्टरों का बोलबाला है जो गांव-गांव में ग्रामीणों के इलाज में लगे हुए हैं।
क्या कहते हैं मेडिकल अधिकारी
इस मामले में ब्लॉक मेडिकल अधिकारी बीएल सिसोदिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा इलाज करने की शिकायत मिलती है तो हम कार्यवाही करते ही हैं, नई रणनीति बनाकर सख्त कार्यवाही की जाएगी, आपने कहा कि पहले ही दो तीन डाक्टरों के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण चल रहे हैं। ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों से शासकीय उच्च चिकित्सकों की सांठगांठ के प्रश्न पर ब्लॉक मेडिकल अधिकारी सिसोदिया ने कहा कि कहा कि ऐसे डॉक्टरों से सांठगांठ का सवाल ही नहीं उठता है, भोली भाली जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। हमने गांव-गांव तक शासन स्तर पर अनेक तरह की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की है ग्रामीण जन उसका लाभ लें।

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