मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के दर्जनभर से अधिक गांवो में धुलेटी पर्व की शाम सैकड़ों मन्नतधारी दहकती आग और दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी मन्नत उतारते हैं। इन मन्नतधारियो में बच्चे, महिलायें, बुजुर्ग भी शामिल होते हैं।
पुलिस प्रशासन बाकायदा इन चुल समारोहों में न सिर्फ सुरक्षा उपलब्ध करवाता है बल्कि खुद पुलिसवाले भी कुछ जगहों पर नंगे पैर वर्दी पहने हुए इन दहकते अंगारों से गुजरते हैं। इस माहौल को देख हर कोई अचरज से भर जाता हैं। झाबुआ जिले के करवड, टेमरिया, सारंगी और रायपुरिया के चुल समारोह ज्यादा चर्चित हैं। इन चुल समारोह का हिस्सा बनने हजारों की संख्या में लोग भी पहुंचते हैं। आग पर चलकर वे इस प्रथा का हिस्सा बनते हैं।
गौरतलब है कि दहकते अंगारों पर चलने को स्थानीय भाषा में चुल पर चलना कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार मन्नतधारी हिंगलाज माता की मन्नत लेते हैं कि उनका अमुक काम हो जायेगा तो वे धुलेटी पर चुल पर चलेंगे। जब उन्हें लगता है कि उनकी फरियाद हिंगलाज माता ने सुनकर मन्नत पूरी कर दी है तो वे बाकायदा नंगे पैर दहकती आग और अंगारों पर चलकर अपनी मन्नत उतारते हैं।
तेज आग, सुलगते अंगारों पर चलकर पूरी होती हैं मन्नत

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