April 18, 2026

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केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखर पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर लगाई तत्काल रोक, जैन समाज मे हर्ष

सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय महत्व वाला पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के खिलाफ जैन समाज लगातार प्रदर्शन कर रहा था। जिसके बाद अब केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र ने सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

इसके साथ ही इस मसले पर एक कमेटी भी बनाई गई है। केंद्र ने झारखंड सरकार से इस मुद्दे पर जरूरी कदम उठाने को भी कहा है।

सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले से जैन समाज काफी नाराज चल रहा था।

केंद्र ने कमेटी बनाते हुए कहा है कि राज्य सरकार समिति में जैन समुदाय से 2 सदस्यों को शामिल करे वहीं, एक सदस्य स्थानीय जनजातीय समुदाय से शामिल किया जाए। केंद्र ने राज्य को 2019 की अधिसूचना के खंड 3 के प्रावधानों पर रोक लगाने के आदेश भी दिए हैं।

यह फैसला केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की जैन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के बाद आया है।केंद्रीय मंत्री ने मीटिंग में जैन समाज के लोगों को भरोसा दिया था कि मोदी सरकार सम्मेद शिखर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

विदित हो कि जैन समाज झारखंड सरकार के उस फैसले से नाराज था, जिसमें तीर्थस्थल सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने की बात कही गई थी। नाराज जैन समाज के लोग हफ्तों से सड़कों अनशन कर रहे थे।

सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने को लेकर सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि दिल्ली, जयपुर और भोपाल सहित देशभर में प्रदर्शन हो रहा था। इस बीच जयपुर में अनशन पर बैठे जैन संत का निधन भी हो गया था। 72 साल के सुज्ञेयसागर महाराज अनशन पर थे। पुलिस ने बताया कि महाराज ने 25 दिसंबर से कुछ खाया नहीं था, जिसके बाद उनका निधन हो गया।

दरअसल जैन धर्म की तीर्थस्थल सम्मेद शिखर झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाड़ी का नाम जैनों के 23वें तीर्थांकर पारसनाथ के नाम पर पड़ा है। ये झारखंड की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। माना जाता है कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने यहीं निर्वाण लिया था। इसलिए ये जैनों के सबसे पवित्र स्थल में से है। इस पहाड़ी पर टोक बने हुए हैं, जहां तीर्थांकरों के चरण मौजूद हैं। माना जाता है कि यहां कुछ मंदिर दो हजार साल से भी ज्यादा पुराने हैं। जैन धर्म को मानने वाले लोग हर साल सम्मेद शिखर की यात्रा करते हैं। लगभग 27 किलोमीटर लंबी ये यात्रा पैदल ही पूरी करनी होती है। मान्यता है कि जीवन में कम से कम एक बार यहां की यात्रा करनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री की तरफ से इसे लेकर पूरा ज्ञापन भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है जिसमें बताया गया कि पारसनाथ पर्वत क्षेत्र में ट्रक्स और तमाम नशीले पदार्थो की बिक्री करना 23:00 संगीत बजाना लॉर्ड इस प्रकार इस्तेमाल करना प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले काम करना पास जानवरों को लाना कैंपिंग बुकिंग करने की इजाजत नहीं होगी इन सभी नियमों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश जारी किए गए।

केंद्र सरकार द्वारा सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के बाद जैन समाज में हर्ष है।

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