श्रद्धा पंचोली। रामायण में रावण ऐसा पात्र है जो कि भगवान राम के चरित्र को पूर्ण रूप से उभारने का काम करता है, राम और रावण की कथा तो सभी ने सुनी है और राम और रावण के युद्ध के बाद रावण के अंत पर कहां गया बुराई पर अच्छाई की जीत हुई उसी पर्व पर विजयादशमी मनाई गई।
वही देखा जाए तो भारत में विजयादशमी का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है कहीं लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं। लेकिन जिन रावण का दहन किया जाता है वह एक
सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा का पुत्र हैं जो रावण एक परम शिव भक्त, उद्भट राजनीतिज्ञ, महापराक्रमी योद्धा, अत्यन्त बलशाली, शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता, प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी थे।
इतना ही नही अच्छे सेनापति होने के साथ वास्तुकला में निपुर्ण होने व तत्व ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं के जानकार भी थे। उन्हें मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू भी जानते थे। रावण ये भी जानते थे कि राम जी भगवान विष्णु के अवतार है और वो सिर्फ उनके जरिये ही मोक्ष प्राप्त करना चाहते थे।
रावण में शिष्टाचार ओर ऊंचे आदर्श वाली मर्यादा भी उनके चरित्र में निहित थी उन्होंने माता सीता से कहा था कि यदि तुम मेरे लिए काम भावन नही रखती हो तो में तुम्हे स्पर्श नही कर सकता शास्त्रों के अनुसार वन्ध्या, रजस्वला, अकामा आदि स्त्री को स्पर्श करना निषेध है। माता सीता का हरण करने के पीछे उनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ भगवान श्री राम के जरिए मोक्ष प्राप्ति करना था।
लेकिन जिस रावण को लोग दहन करते है उन्होंने कभी माता सीता को हाथ तक नहीं लगाया, लेकिन वही आज के लोग किसी पराई स्त्री को देखना, उस पर प्रतिक्रिया करना, उसकी मर्जी के बिना उसे छूना, बलात्कार, ज्यादती और मारपीट करना ऐसे कहीं अपराध आज के लोग कर रहे हैं ये अपराध रावण की अपराध से कहीं ज्यादा बड़े हैं। अब इसका विश्लेषण किया जाये तो रावण कौन हुआ ?
विजयादशमी का पर्व हमें बहुत कुछ सिखाता है लेकिन आज रावण ही रावण दहन कर रहा है स्वयं को राम के रूप में रखकर सभी लोग रावण दहन के लिए जाते हैं लेकिन वह असल में स्वयं के अंदर के रावण को नहीं देख पाते पहले स्वयं के रावण का दहन करना जरूरी है जिस दिन देश में बलात्कार की घटनाएं व अपराधों पर रोकथाम होने लग जाएगी तब ही विजयादशमी का पर्व सही मायने में सार्थक होगा।
रावण की एक गलती आज भी उनके चरित्र पर कीचड़ उछाल रही है लेकिन कलयुगी रावण तो हर कदम पर गलती करता है रावण की तो उनके जीवन की एक गलती ही थी जिसका वो भुगतान अभी तक कर रहे हैं पर कलयुगी रावण को गलती करने पर बढ़ावा दिया जाता है कलयुगी रावण का अब कोई अंत नहीं है दिन पर दिन अपराध बढ़ने और अपराधों को नेतृत्व करने के साथ-साथ उन्हें संरक्षण प्रदान करना भी इन्हीं कलयुगी रावण का ही काम है जिनकी वजह से आज स्त्री बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।
कलयुग के रावण का दहन कब होगा, आखिर कब तक हम ऐसे ही रावण का दहन करते रहेंगे, अगर हर नियम में संशोधन हो सकता है तो क्या रावण की जगह पर कलयुगी रावण का अंत नहीं हो सकता ऐसे कलयुग के रावण को फांसी पर चढ़ाया जाता है। अगर उसे सरेआम दहन किया जाए तो उन बहनों की आत्मा को शांति मिलेगी, जिनके साथ ये लोग कई तरह के कुकर्म करते हैं। इस कलयुग के रावण का अंत कब होगा और जिस दिन यह होगा उसी दिन सही मायने में विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।

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