सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा377 पर पहले दिन की सुनवाई ख़त्म हो गई है पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ आईपीसी की धारा377 को ख़त्म करने के लिए कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है याचिकाकर्ता ने बातचीत में बताया कि पहले दिन की सुनवाई काफ़ी सकारात्मक रही और उन्हें पूरी उम्मीद है कि कोर्ट उनका पक्ष समझेगी नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहाए कोर्ट का रुख़ काफ़ी अच्छा रहा उन्होंने माना कि हमारे साथ समाज में भेदभाव होता है कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से राइट टू च्वाइस ऑफ़ पार्टनर का हवाला भी दिया गया सोमवार को केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सुनवाई स्थगित करने की मांग की थीए जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज़ कर दिया था SC ने साल 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को पलटते हुए इसे अपराध की श्रेणी में डाल दिया था इसके बाद सुप्रीम कोर्ट को इसके विरोध में कई याचिकाएं मिली आईआईटी के 20 छात्रों ने नाज़ फाउंडेशन के साथ मिलकर याचिका डाली थी इसके अलावा अलग-अलग लोगों ने भी समलैंगिक संबंधों को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया थाए जिसमें ललित ग्रुप के केशव सूरी भी शामिल हैं अब तक सुप्रीम कोर्ट को धारा377 के ख़िलाफ़ 30 से ज़्यादा याचिकाएँ मिली हैं याचिका दायर करने वालों में सबसे पुराना नाम नाज़ फाउंडेशन का है जिसने 2001 में भी धारा377 को आपराधिक श्रेणी से हटाए जाने की मांग की थीण्सोमवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई का पहला दिन रहा हालांकि इस मामले में रिव्यू पिटिशन पहले ही खारिज कर चुकी है और इसके बाद क्यूरेटिव पिटिशन दाख़िल की गई है
अब समलैंगिक होना अपराध नहीं जल्द ही नियम में बदलाव किये जाए SC

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