ग्वालियर: शहर की प्रतिष्ठित जीवाजी यूनिवर्सिटी (Jiwaji University) में अब शिक्षा और आधुनिक अनुसंधान के स्तर को और ऊंचा उठाने के लिए बदलाव की नई बयार शुरू हो चुकी है। विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के साथ-साथ बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण (Training) दिलाने के लिए विश्वविद्यालय एक के बाद एक बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू (MoU) साइन कर रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के साथ साझेदारी के बाद, अब जीवाजी विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश स्थित स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका दूरगामी और बड़ा लाभ आने वाले समय में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को मिलने वाला है।
🏛️ लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय आयोजन के दौरान जेयू और यूपी फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के बीच बनी सहमति
एमओयू की पृष्ठभूमि:
- समारोह का आयोजन: जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु (Vice Chancellor) प्रो. डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भव्य और विशाल आयोजन संपन्न हुआ था, जिसमें भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों से भी प्रमुख शैक्षणिक संस्थान और विशेषज्ञ शामिल हुए थे।
- समझौता ज्ञापन: इसी वैश्विक कार्यक्रम के दौरान जीवाजी विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश के अत्याधुनिक राज्य फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू साइन किया गया।
🔬 ट्रेनिंग, रिसर्च और प्लेसमेंट के क्षेत्र में होगा मजबूत इंगेजमेंट; स्टूडेंट्स व टीचर्स का होगा एक्सचेंज
कार्यक्रम और शोध की रूपरेखा:
- संस्थान की विशेषता: कुलगुरु ने बताया कि उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ का एक बेहद आधुनिक और प्रतिष्ठित संस्थान है, जो नवीनतम तकनीक के आधार पर फॉरेंसिक साइंस, टेक्नोलॉजी, लॉ (कानून) और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर अध्ययन, अनुसंधान और प्लेसमेंट की गतिविधियों में लगातार संलग्न रहता है।
- कार्यक्रमों का आदान-प्रदान: इस कार्यक्रम के दौरान वहां के डायरेक्टर डॉ. जी.के. गोस्वामी के साथ इस एमओयू पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों संस्थानों ने आपसी सहमति से प्रोग्राम एक्सचेंज (Program Exchange) तय किया है। इसके तहत अब दोनों विश्वविद्यालयों के बीच छात्र-छात्राओं, शिक्षकों (Teachers), नई तकनीक और प्लेसमेंट से जुड़े ज्ञान का निरंतर आदान-प्रदान किया जाएगा।
🌟 विद्यार्थियों के साथ-साथ पूरे विश्वविद्यालय को मिलेंगे विकास के नए आयाम
भविष्य की संभावनाएं और लाभ:
- नवीन तकनीकों का लाभ: कुलगुरु डॉ. दिवाकर राजपूत के मुताबिक, इस एमओयू से जीवाजी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को एक नई दिशा मिलेगी। इससे फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में हो रहे नए आविष्कार, आधुनिक अनुसंधान और उन्नत अध्ययन से विश्वविद्यालय के छात्र बहुत आसानी से लाभान्वित हो सकेंगे।
- करियर के नए अवसर: इस समझौते के बाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए ट्रेनिंग और प्लेसमेंट के क्षेत्र में रोजगार के ढेरों नए और बेहतरीन अवसर खुलेंगे, जिससे उनका भविष्य और अधिक सुरक्षित हो सकेगा।

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