राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में 36 प्रोफेसरों की पदोन्नति का लंबे समय से अटका हुआ मामला अब अंतिम चरण में पहुँच गया है। विश्वविद्यालय में करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत प्रोफेसरों को प्रमोशन देने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पिछले चार सालों से अंतिम आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो सका था। प्रशासनिक स्तर पर फाइल का गहन परीक्षण पूरा करने के बाद अब इसे अंतिम निर्णय हेतु कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा के पास भेज दिया गया है। कुलगुरु द्वारा औपचारिक स्वीकृति मिलते ही पात्र प्रोफेसरों की पदोन्नति का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
⏳ चार साल पहले गठित हुई थी स्क्रूटनी कमेटी; दस्तावेजों के सत्यापन के बाद भी अटका रहा मामला
पदोन्नति प्रक्रिया का इतिहास:
- कमेटी का गठन: चार साल पूर्व प्रोफेसरों की पदोन्नति के आवेदनों की जांच के लिए एक विशेष स्क्रूटनी कमेटी का गठन किया गया था।
- कमेटी के प्रमुख सदस्य: इस स्क्रूटनी समिति में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रशांत कुमार जैन, प्रो. सीमा सक्सेना, प्रो. असीम तिवारी, प्रो. एससी चौबे और डिप्टी रजिस्ट्रार आर.के. सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
- सत्यापन पूर्ण: इस कमेटी ने सभी आवेदक प्रोफेसरों के शैक्षणिक व प्रशासनिक दस्तावेजों की गहन जांच की और दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कराया।
⚠️ तत्कालीन कुलपति और रजिस्ट्रार की आपत्तियों से फंसा पेंच; इस्तीफों के बाद ठप हुई प्रक्रिया
आपत्तियां और प्रशासनिक अड़चनें:
- प्रशासनिक आपत्तियां: पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन कुलपति और रजिस्ट्रार स्तर से प्रोफेसरों के मामलों में कई प्रशासनिक आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। हालांकि, बाद में तत्कालीन कुलपति राजीव त्रिपाठी ने इन आपत्तियों का निराकरण कर दिया था।
- इस्तीफे से हुआ विलंब: निराकरण के बावजूद तत्कालीन कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे के बाद पदोन्नति की फाइल आगे नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
- कमेटी सदस्य की आपत्ति: इस बीच स्क्रूटनी कमेटी के सदस्य एससी चौबे ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि उन्हें प्रोफेसरों के आवेदनों की जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, यद्यपि समिति के प्रतिवेदन पर उनके हस्ताक्षर दर्ज थे।
🏁 आपत्तियों का निराकरण पूरा; कुलगुरु के अंतिम आदेश का इंतजार
वर्तमान स्थिति और आगे की राह:
- विश्वविद्यालय स्तर पर परीक्षण: RGPV प्रशासन ने हाल ही में इन सभी तकनीकी और प्रक्रियात्मक आपत्तियों का गहन परीक्षण किया और उन्हें विधिवत रूप से सुलझा लिया।
- अंतिम निर्णय बाकी: अधिकारियों द्वारा सभी अड़चनों का निराकरण करने के पश्चात पदोन्नति की अंतिम फाइल कुलगुरु को सौंप दी गई है। अब केवल कुलगुरु स्तर से आधिकारिक आदेश जारी होना शेष है, जिसके तुरंत बाद पात्र प्रोफेसरों को कैस (CAS) के तहत प्रमोशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

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