मध्य प्रदेश विधानसभा का आगामी शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक संचालित होगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र के दौरान कुल 5 बैठकें आयोजित की जाएंगी। पिछला शीतकालीन सत्र भी पांच दिनों का ही रखा गया था, जिसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस बार के सत्र के दौरान राज्य सरकार सदन के पटल पर दूसरा अनुपूरक बजट यानी लेखानुदान (Vote on Account) भी रखेगी, जिसके माध्यम से जरूरी खर्चों और विकास कार्यों के लिए वित्तीय मंजूरी ली जाएगी। इस सत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मध्य प्रदेश विधानसभा का पूरा कामकाज पूरी तरह से डिजिटल होने जा रहा है, और प्रश्नकाल को भी ऑनलाइन किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
💻 विधानसभा में लागू हुआ ई-विधान ऐप (NEVA); कागजमुक्त व्यवस्था की ओर बड़ा कदम
डिजिटल प्रणाली और प्रशिक्षण:
- पेपरलेस कामकाज: मध्य प्रदेश विधानसभा के इस शीतकालीन सत्र से ‘नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन’ (NEVA) को पूरी तरह लागू किया जा रहा है, जिससे विधानसभा का समस्त कामकाज ऑनलाइन संचालित होगा।
- टेबलेट का उपयोग: अब विधायकों को अपने सवाल, ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्तावों की सूचना ऑनलाइन ही देनी होगी। सदन में सभी विधायकों की टेबल पर टैबलेट लगाए जा चुके हैं, जिन पर वे अपने पूछे गए प्रश्न और सरकार द्वारा दिए गए जवाब देख सकेंगे।
- डिजिटल विधेयक: सरकार द्वारा लाए जाने वाले विधेयकों की प्रिंटेड कॉपियां बांटने के बजाय सीधे टैबलेट पर ही भेजी जाएंगी। इस नए डिजिटल सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए विधायकों को पहले ही तीन दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
📜 दो बड़े कानूनों में संशोधन की तैयारी; पंचायत राज और कॉलोनाइजर एक्ट में बदलाव संभव
संशोधन विधेयक और प्रशासनिक तैयारी:
- ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के कानून: विधानसभा के इस सत्र के दौरान राज्य सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में जुटी है।
- पंचायत एवं नगरीय निकाय: इसमें एक विधेयक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ‘पंचायत राज अधिनियम’ में संशोधन से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा विधेयक नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा ‘कॉलोनाइजर एक्ट’ में संशोधन के लिए पेश किया जा सकता है।
🗣️ कांग्रेस ने उठाई सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग; जनता के मुद्दों पर चर्चा की रखी बात
विपक्ष का रुख:
- छोटा सत्र होने पर आपत्ति: दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मानसून और शीतकालीन सत्रों की अवधि लगातार कम होने पर आपत्ति जताई है और सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है।
- विधायक का बयान: कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि प्रदेश की जनता से जुड़े हुए ऐसे कई गंभीर और महत्वपूर्ण विषय हैं, जिन्हें विधानसभा में सरकार के सामने उठाने के लिए सत्र के दौरान पर्याप्त समय मिलना चाहिए, लेकिन सरकार इन समस्याओं से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष से सत्र की अवधि बढ़ाए जाने का औपचारिक आग्रह किया जाएगा।

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