November 3, 2026

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Organ Donation Green Corridor Jabalpur News: जबलपुर एयरपोर्ट का सराहनीय कदम: अंगदान के लिए रात में खुला डुमना एयरपोर्ट, एयर एंबुलेंस से पहुंचे हार्ट और लिवर

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए जबलपुर के नरेंद्र रजक भले ही जिंदगी की जंग हार गए हों, लेकिन जाते-जाते कई गंभीर मरीजों को एक नया जीवन दे गए। डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके परिजनों ने बेहद कठिन और दुखद घड़ी में साहस दिखाते हुए अंगदान (Organ Donation) का ऐतिहासिक फैसला लिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन, जिला प्रशासन और डुमना एयरपोर्ट प्रबंधन के आपसी समन्वय से अंगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए अभूतपूर्व ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार किया गया। नरेंद्र का हार्ट और लिवर विशेष एयर एंबुलेंस के जरिए अहमदाबाद भेजा गया, जबकि उनकी दोनों किडनियां जबलपुर में ही भर्ती जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट की जाएंगी।

🏥 सड़क हादसे में ब्रेन डेड हो गए थे नरेंद्र; परिजनों ने दुखों के बीच दिखाई मिसाल

घटना की पृष्ठभूमि और परिजनों की भावनाएं:

  • निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज: गुप्तेश्वर क्षेत्र निवासी 40 वर्षीय नरेंद्र रजक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले दो दिनों से उनका गहन इलाज चल रहा था, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
  • परिजनों का साहसिक निर्णय: नरेंद्र के स्वस्थ होने की उम्मीद खत्म होने के बाद उनके परिजनों ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए उनके अंग दान करने का फैसला लिया, ताकि दूसरे मरीजों को नया जीवन मिल सके।
  • भाई का भावुक बयान: नरेंद्र के भाई शिव कुमार रजक ने कहा, “हम इस बात से बेहद दुखी हैं कि हमारा भाई हमें छोड़कर चला गया है, लेकिन उसके अंग अलग-अलग शरीरों में जीवित रहेंगे, हमें इस बात की आत्मिक शांति और खुशी है।” अंगदान की प्रक्रिया के दौरान अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने मोमबत्तियां जलाकर नरेंद्र को अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।
🩺 हार्ट और लिवर अहमदाबाद रवाना, दोनों किडनियां जबलपुर के मरीजों को होंगी ट्रांसप्लांट

अंगों का विवरण और अस्पताल आवंटन:

  • अहमदाबाद भेजे गए अंग: निजी अस्पताल के प्रबंधक राजीव बद्देरिया ने बताया कि अंगदान की स्थापित प्रक्रिया के तहत नरेंद्र का हार्ट (हृदय) और लिवर अहमदाबाद के विशेषज्ञ अस्पताल में भेजे गए।
  • जबलपुर में किडनी ट्रांसप्लांट: नरेंद्र की एक किडनी जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को ट्रांसप्लांट की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में भर्ती जरूरतमंद मरीज को दी जाएगी। इसके अलावा उनकी आंखें और स्किन (त्वचा) भी दान की गई हैं।
🚨 समय की चुनौती: रात में एयरपोर्ट खुलवाकर बनाया गया निर्बाध ग्रीन कॉरिडोर

प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी का बेहतरीन तालमेल:

  • ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण: अंगों को सुरक्षित और निर्धारित समय सीमा के भीतर अहमदाबाद पहुंचाना एक बेहद बड़ी चुनौती थी। इसके लिए निजी अस्पताल से लेकर डुमना एयरपोर्ट तक बिना किसी बाधा के ट्रैफिक क्लियर कराकर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
  • रात में खोला गया डुमना एयरपोर्ट: सामान्य तौर पर जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर रात के समय विमानों की लैंडिंग या टेकऑफ नहीं होती है। लेकिन अंगदान की संवेदनशीलता और समय की अहमियत को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन ने विशेष अनुमति लेकर तात्कालिक व्यवस्था की। अहमदाबाद से आई एयर एंबुलेंस से अंगों को समय पर भेजा गया।
  • सराहनीय तालमेल: इस पूरे जटिल और संवेदनशील मिशन में एयरपोर्ट डायरेक्टर राजेश कुमार मौर्य, एटीसी प्रभारी नीरज गुडवानी और उनकी समर्पित टीम ने रातभर सक्रिय रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल प्रबंधन, पुलिस, जिला प्रशासन और एयरपोर्ट अधिकारियों के इस तालमेल से यह ग्रीन कॉरिडोर पूरी तरह सफल रहा।
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