बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर पिपरी रैय्यत गांव से एक बेहद हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया है। दरअसल, यहां के एक किसान नारायण लक्ष्मण महाजन ने पिछले साल अपने खेत में ट्यूबवेल (बोरवेल) करवाया था, जो उस समय पूरी तरह फेल हो गया था।
लेकिन एक साल बाद अचानक उसी बंद पड़े ट्यूबवेल से पानी की तेज धारा आसमान की तरफ उड़ी। पानी का यह फव्वारा इतनी तेज गति से ऊपर उठा कि देखते ही देखते करीब 40 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह अजीबोगरीब सिलसिला करीब डेढ़ घंटे तक लगातार चलता रहा, जिसे देखकर खेत मालिक सहित आसपास के तमाम किसान और ग्रामीण दंग रह गए।
💧 फेल ट्यूबवेल से अचानक पानी निकलने से मचा हड़कंप, देखने उमड़ा जनसैलाब
खेत में अचानक उड़ती इस जलधारा को देखने के लिए आसपास के लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। स्थानीय लोगों ने इस अनोखे दृश्य को अपने मोबाइल के कैमरों में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
खेत के मालिक किसान नारायण महाजन ने बताया, “मैंने पिछले साल खेत में ट्यूबवेल कराया था, लेकिन पानी न मिलने के कारण वह फेल हो गया था। मंगलवार देर शाम अचानक उसी बंद पड़े ट्यूबवेल ने तेज प्रेशर के साथ पानी उगलना शुरू कर दिया। पानी का दबाव इतना अधिक था कि जलधारा करीब 40 फीट ऊपर तक जाती दिखाई दी। हमने तुरंत इसकी सूचना पटवारी और ग्राम पंचायत को दी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर जांच कराने की बात कही है।”
🗺️ शाहपुर थाना क्षेत्र का मामला, सुरक्षा के मद्देनजर ट्यूबवेल कोवाया गया बंद
बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पिपरी रैय्यत गांव का है। किसान ने बताया कि जब सालभर पहले ट्यूबवेल असफल हो गया था, तब सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने ट्यूबवेल के ऊपरी हिस्से को एक मजबूत लोहे के ढक्कन से ढक दिया था।
लेकिन एक साल बाद अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद एहतियात के तौर पर किसान ने ट्यूबवेल को दोबारा सुरक्षित तरीके से बंद करवा दिया है, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
📋 प्रशासन की प्रतिक्रिया: संबंधित विभाग से कराई जाएगी जांच
मामले की जानकारी देते हुए क्षेत्र के पटवारी अमन खरे ने बताया, “यह अजीबोगरीब मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैंने किसान को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल ट्यूबवेल को अच्छी तरह ढकने के निर्देश दिए थे, जिसे किसान द्वारा सुरक्षित कर दिया गया है। बुधवार को संबंधित पीएचई (PHE) या भू-वैज्ञानिक विभाग के अधिकारियों को बुलाकर इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाएगी।”

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