जबलपुर। विभागीय जांच के बाद आपराधिक मामलों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद से फरार चल रही महिला सीएसपी नेहा पच्चीसिया मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत पाने की लगातार कोशिश कर रही है। इसके लिए उनके द्वारा अदालत में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को निरस्त करने के साथ-साथ अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की गई है।
📄 हाईकोर्ट में दी गई दलील: ‘जमीन की खरीद-फरोख्त से मेरा कोई लेना-देना नहीं’
इस महत्वपूर्ण याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की युगलपीठ—जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस राम कुमार चौबे के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से अपना पक्ष रखा गया।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि “जमीन की खरीदी-फरोख्त में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भूमिका नहीं है। उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने के बावजूद आपराधिक प्रकरण दर्ज करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।” अदालत ने पक्ष सुनने के बाद अगली सुनवाई तय की है, जिसमें राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से अपने पक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
🔍 हत्या के आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत दिलाने और कम कीमत पर जमीन खरीदने का है आरोप
उल्लेखनीय है कि कटनी की तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ कुठला थाने में धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। इस मामले में कटनी पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी पर दस-दस हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।
महिला सीएसपी पर मुख्य आरोप यह है कि कुठला थाना क्षेत्र के एक हत्या के मामले में निर्धारित समयावधि के भीतर चालान पेश नहीं किया गया, जिसके चलते आरोपियों को ‘डिफॉल्ट जमानत’ का कानूनी लाभ मिल गया। इसके एवज में आरोप है कि महिला सीएसपी ने उन आरोपियों कीमती जमीन बहुत कम दरों पर अपने एजेंट के नाम पर खरीद ली।
💰 ‘बैंक खातों से कोई लेनदेन नहीं, साक्ष्यों का अभाव’ — बचाव पक्ष का तर्क
विभागीय स्तर पर चली जांच के बाद महिला सीएसपी के खिलाफ मामला पंजीबद्ध किया गया था। अग्रिम जमानत के लिए दायर की गई याचिका में नेहा पच्चीसिया के वकील ने कोर्ट को जानकारी दी:
- दूसरे के नाम पर थी जमीन: जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी।
- पैसों का लेनदेन: उनके बैंक खाते में क्षितिज राज पात्रे द्वारा राशि ट्रांसफर की गई थी।
- कोई साक्ष्य नहीं: महिला सीएसपी के व्यक्तिगत बैंक खाते से इस सौदे के दौरान किसी भी प्रकार का कोई वित्तीय लेनदेन नहीं हुआ है। भूमि की खरीद-फरोख्त में उनकी संलिप्तता का कोई भी ठोस सबूत पुलिस के पास नहीं है, फिर भी उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
मामले में अगली सुनवाई के दौरान शासन और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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