छिन्दवाड़ा। दीपावली के त्यौहार के दौरान बच्चों की आंखों की रोशनी छीनने और गंभीर हादसों की वजह बनने वाली ‘कार्बाइड गन’ के खिलाफ छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
छिंदवाड़ा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हरेंद्र नारायण ने जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में कार्बाइड गन के निर्माण, भंडारण, क्रय-विक्रय और उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है। यदि कोई भी व्यक्ति या व्यापारी कार्बाइड गन या कैल्शियम कार्बाइड की अवैध बिक्री करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर जेल भेजा जाएगा।
⚠️ ‘आंखों और त्वचा के लिए अत्यंत खतरनाक है एसिटिलीन गैस’ — कलेक्टर
दीपावली पर्व पर आमतौर पर पारंपरिक पटाखों और आतिशबाजी का उपयोग किया जाता है। लेकिन पिछले एक-दो वर्षों में देखा गया है कि पटाखों के विकल्प के रूप में कुछ लोग कार्बाइड गन का खतरनाक इस्तेमाल कर रहे हैं।
- विस्फोटक प्रक्रिया: इसमें कैल्शियम कार्बाइड और पानी का मिश्रण उपयोग किया जाता है, जिससे तुरंत अत्यधिक ज्वलनशील एसिटिलीन गैस (Acetylene Gas) बनती है।
- गंभीर खतरा: यह गैस तेजी से विस्फोट में बदलती है, जिससे आंखों की रोशनी जाने और त्वचा झुलसने का गंभीर खतरा रहता है।
- कानूनी कार्रवाई: कलेक्टर के अनुसार, यह गन जन सामान्य की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। इस प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
🔍 पटाखा दुकानों की होगी जांच, BNSS की धारा-163 के तहत आदेश लागू
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हरेंद्र नारायण ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा-163 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया है।
मध्यप्रदेश शासन गृह (सी-अनुभाग) मंत्रालय, वल्लभ भवन भोपाल के निर्देशानुसार कैल्शियम कार्बाइड एवं अन्य खतरनाक रसायनों के अवैध आयात, भंडारण, परिवहन तथा वितरण पर रोक लगाने के लिए पटाखा दुकानों व संदिग्ध ठिकानों की गहन जांच की जाएगी। यह आदेश आगामी आदेश तक संपूर्ण जिले में प्रभावी रहेगा।
🔫 जानिए क्या होती है ‘कार्बाइड गन’ और क्यों है इतनी खतरनाक?
मूल रूप से खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले जंगली जानवरों और पक्षियों को भगाने के लिए किसानों द्वारा कार्बाइड का सीमित उपयोग किया जाता था।
- बनावट: यह गन मोटे पीवीसी (PVC) पाइपों से बनाई जाती है, जो देखने में बिल्कुल बंदूक जैसी लगती है।
- काम करने का तरीका: इसके पाइप में कैल्शियम कार्बाइड और थोड़ा पानी डालकर ढक्कन बंद करके हिलाया जाता है। रासायनिक क्रिया से पाइप के भीतर तीव्र ज्वलनशील गैस भर जाती है, जिसे पीछे बने छोटे छेद से स्पार्क करते ही बहुत तेज धमाका होता है।
- बढ़ता दुरुपयोग: खेतों से शुरू हुआ यह चलन धीरे-धीरे बाजारों तक पहुँच गया और लोगों ने इसे दिवाली के पटाखों की तरह बेचना और इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जो बच्चों और आम नागरिकों के जीवन के लिए बेहद जानलेवा साबित हो रहा है।

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