ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की बैठक में मंगलवार को पेट्रोल-डीजल खरीदी का मुद्दा गरमाया रहा। बैठक में एक अहम प्रस्ताव पास किया गया, जिसके तहत अब से नगर निगम ग्वालियर स्थानीय स्तर से ही पेट्रोल और डीजल की खरीदी करेगा।
यह निर्णय पिछले 2 वर्षों एवं हालिया महीनों में हुई ईंधन खरीदी के दौरान निगम को हुए लगभग 6 करोड़ रुपये के भारी घाटे के सामने आने के बाद लिया गया है। उल्लेखनीय है कि अब तक ग्वालियर नगर निगम मध्य प्रदेश की बजाय पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के झांसी शहर से ईंधन की आपूर्ति ले रहा था।
💸 3.70 रुपये की बचत के गणित में ऐसे लगा 6 करोड़ का फटका
दरअसल, उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश की तुलना में पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग 11 रुपये तक सस्ते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए करीब 6 महीने पहले एमआईसी बैठक में प्रस्ताव पास करवाकर नगर निगम ने झांसी से ईंधन खरीदना शुरू किया था।
- प्रारंभिक आकलन: नगर निगम के वाहनों में हर महीने लगभग 1 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। दावों के अनुसार, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च काटने के बाद भी निगम को प्रति लीटर ₹3.70 की बचत होती, जो सालाना करीब ₹1 करोड़ 33 लाख बैठती थी।
- उल्टा पड़ा गणित: लेकिन व्यावहारिक धरातल पर दावों के विपरीत नगर निगम को प्रति लीटर 34 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ गए। नतीजतन, बीते 6 महीनों में ही नगर निगम को करीब 6 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष घाटा झेलना पड़ा।
🏛️ बाल भवन में MIC की बैठक: स्थानीय स्तर पर डीजल खरीदी के प्रस्ताव पर लगी मुहर
इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए मंगलवार को बाल भवन में महापौर, एमआईसी सदस्यों और नगर निगम के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित एमआईसी बैठक में नया प्रस्ताव रखा गया।
इसमें सर्वसम्मति से झांसी के बजाय ग्वालियर के ही पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदी को स्वीकृति दे दी गई है। हालांकि, पूर्व में हुए इस करोड़ों के नुकसान को लेकर फिलहाल किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की जवाबदेही तय नहीं की जा सकी है।
💬 नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी एवं एमआईसी सदस्य का आधिकारिक बयान
नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया, “एमआईसी बैठक में पंप ऑपरेटरों की मियाद वृद्धि और बजट पुनर्नियोजन को स्वीकृति मिल गई है। ग्वालियर से ही प्रतिस्पर्धी दरों पर डीजल खरीदी को भी हरी झंडी दे दी गई है। अब यह प्रस्ताव नगर निगम परिषद में जाएगा, जहां से पारित होते ही स्थानीय स्तर से खरीदी शुरू कर दी जाएगी।”
वहीं, एमआईसी सदस्य अवधेश तोमर ने घाटे पर सफाई देते हुए कहा, “झांसी से डीजल खरीदी का निर्णय किसी की जानबूझकर की गई गलती नहीं थी। प्रस्ताव पास होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के कारण अचानक ईंधन के दाम बढ़ गए थे। बाद में जब इसे रद्द करने पर सहमति बनी, तब तक कीमतें फिर बदल गईं। इसके बाद ग्वालियर के SAF पंप से सहमति लेने में डेढ़ महीने का समय लग गया। इस प्रशासनिक देरी के कारण यह घाटा हुआ है। आगे नुकसान न बढ़े, इसलिए यह नया प्रस्ताव पास किया गया है।”

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